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यहां है सृष्टि के रचयिता का डाक घर नाम है ब्रह्मांड डाक घर

नरसिंहपुर जिले में नर्मदा नदी के ब्रह्मांड घाट पर स्थित है ५३ साल पुराना यह खास डाकघर

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नरसिंहपुर जिले में नर्मदा नदी के ब्रह्मांड घाट पर स्थित है ५३ साल पुराना यह खास डाकघर

नरसिंहपुर जिले में नर्मदा नदी के ब्रह्मांड घाट पर स्थित है ५३ साल पुराना यह खास डाकघर

अजय खरे. नरसिंहपुर। सृष्टि की रचना भले ही ब्रह्मा जी ने की पर उनकी बनाई दुनिया के लोगों के बीच संवाद की व्यवस्था डाक विभाग ने की। देश का इकलौता ऐसा डाकघर जो ब्रह्मा को समर्पित है वह मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में नर्मदा नदी के ब्रह्मांड घाट पर है। इस डाकघर का नाम है ब्रह्मांड डाक घर। ब्रह्मा की तपोस्थली के महत्व को ध्यान में रखते हुए यह डाकघर यहां खोला गया। स्थानीय स्तर पर इसे ब्रह्माजी के डाक घर के नाम से जाना जाता है।
डाक विभाग के लिए पिन कोड नंबर 487330 खास महत्व रखता है क्योंकि यह आम डाक घर का नंबर नहीं है बल्कि यह उस तपोस्थली के डाक घर का है जहां खुद ब्रह्माजी ने तपस्या की थी। दरअसल यह डाकघर बरमान में नर्मदा तट पर बसे बरमान कला गांव में स्थित है। कहा जाता कि पहले यह संपूर्ण क्षेत्र ब्रह्मांड घाट कहलाता था। कालांतर में अपभ्रंश के रूप में इस क्षेत्र को बरमान के नाम से जाना जाने लगा। डाक विभाग ने 1966 में जब यहां उप डाक घर खोला तो इसके ऐतिहासिक धार्मिक महत्व को बनाए रखने के लिए डाक घर का नाम ब्रह्मांड डाक घर रख दिया। किराए के भवन में संचालित इस डाक घर में दो लोगों का स्टाफ है और डाक संचार एवं संप्रेषण व बैंकिंग से संबंधित समस्त आधुनिक सुविधाएं हैं। यहां पदस्थ उप डाक पाल का कहना है कि इसका नाम ही इसकी पहचान है।
घाट के पास है स्थित
अपने नाम के कारण खास बना यह डाकघर ब्रह्मांड घाट के नजदीक ही घाट के रास्ते में स्थित है। बाहर से आने वाले लोगों की नजर जब इस डाकघर पर पड़ती है तो उन्हें इसके नाम की वजह से इसके बारे में जानने की जिज्ञासा पैदा होती है। घाट की सीढिय़ां उतरते ही एक कुंड मिलता है जिसे ब्रह्मांड कुंड के नाम से जाना जाता है जबकि नदी के बीच स्वर्ण पर्वत नाम के टापू पर वह मंदिर स्थित है जहां ब्रह्मा ने अपने आराध्य देव दीपेश्वर महादेव को प्रसन्न करने के लिए जप तप किया था। यह मंदिर दीपेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि ब्रह्मा ने शाप मुक्त होने के लिए इस मंदिर में तपस्या की थी। इस मंदिर को साधना सिद्धि के लिहाज से सिद्ध क्षेत्र माना जाता है। मंदिर पहुंचने के लिए सीढ़ी घाट से जल मार्ग से नाव के सहारे ही जाया जा सकता है। गर्मी के दिनों में टापू को घेर कर बहने वाली एक जल धारा के सूखने पर रेत घाट की ओर से पैदल टापू पर चढक़र मंदिर पहुंच सकते हैं। यह एक प्राकृतिक रमणीक स्थल है जहां से नदी के दोनों ओर का नजारा बड़ा दर्शनीय होता है।

अभय मुद्रा में श्रीहनुमान के दर्शन
इस स्वर्ण पर्वत पर कुछ समय पहले पुलिस विभाग के रिटा.डीएसपी श्रीवास्तव ने श्रीहनुमान की अभय मुद्रा में दर्शन देते हुए विशाल मूर्ति की स्थापना कराई थी। जिससे इस पर्वत और ब्रह्मांड घाट का सौंदर्य और बढ़ गया है। मंदिर के अंदर राम भक्त हनुमान की लघु आकार की प्रतिमा विराजमान है जबकि मंदिर की छत पर विशाल रूप में श्रीहनुमान विराजे हैं। भोर की पहली किरण के साथ काफी दूर से श्रीहनुमान के दिव्य दर्शन भक्तों को आनंद से भर देते हैं।