
अद्र्धवार्षिक परीक्षा सिर पर, बिना पुस्तक अधर में बच्चों की पढ़ाई
नरसिंहपुर. राज्य शिक्षा केंद्र के निर्देशानुसार आगामी माह में विद्यार्थियों की अर्ध वार्षिक परीक्षाएं होनी हैं पर अभी तक स्कूलों में किताबें नहीं पहुंची हैं, जबकि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए चार माह बीत चुके हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब बच्चों को अभी तक पुस्तकें नहीं मिलीं तो वे अब क्या पढ़ कर परीक्षा देंगे और परीक्षा का कैसा परिणाम आएगा इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। डीपीसी सहित ब्लाकों में मॉनिटरिंग का जिम्मा संभाल रहे प्रभारी बीईओ की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
नया शैक्षणिक सत्र जून- जुलाई माह में शुरू हो गया था, शासन ने सुचारू पढ़ाई लिखाई के लिए किताबें स्कूलों के लिए भेजीं। किन्तु पुस्तकें ब्लॉक ऑफिस में महीनों से रखी हंै। शासन ने ब्लॉक से सीधे स्कूलों तक किताबें पहुंचाने का आदेश दिया था, लेकिन ब्लॉक से स्कूलों को पुस्तकें व अभ्यास पुस्तिकाएं नहीं भेजी जा रही हैं ।
करेली और गोटेगांव ब्लॉक में ठप हुई पढ़ाई
कॉपी किताबों के वितरण में उदासीनता की वजह से करेली एवं गोटेगांव में शैक्षणिक व्यवस्था पटरी से उतर गई है। विकासखण्ड करेली में बच्चों की पढ़ाई एफएलएन कार्यक्रम के तहत पहली- दूसरी कक्षा में दक्षता के तहत चल रही और कक्षा 3 से 8 तक अभ्यास एटग्रेट पुस्तकों व अभ्यास पुस्तक के माध्यम से पढ़ाई कराना है। लेकिन करेली और गोटेगांव विकासखण्ड में बच्चे बिना पुस्तकों के पढऩे को मजबूर हो रहे हैं। बिना पुस्तकों के बच्चों की कैसी दक्षता आएगी ये विचारणीय है। शासन से एटग्रेट की पुस्तकें गोटेगांव और करेली के बीआरसी कार्यालय में आ चुकी हैं। कुछ किताबें आनन-फानन में संकुल या जन शिक्षा केंद्र तक में रखवाई गई हंै। लेकिन अभी तक स्कूलों में नहीं भेजी गईं।
बारिश में गीली हो गईं पुस्तकें
जनपद शिक्षा केन्द्र करेली में पदस्थ प्रभारी बीआरसी कई सालों से पाठ्य पुस्तक प्रभारी हैं। इनकी उदासीनता की वजह से अभी तक बच्चों को पुस्तकें वितरित नहीं की गई हंै। जबकि शासन की मंशा है कि समस्त बच्चों को अभ्यास पुस्तिकाओं और एटग्रेट कि पुस्तकें समय पर मिलें। जिससे उनका अध्ययन बच्चों द्वारा किया जा सके और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बच्चों में दक्षता शैक्षिक गुणवत्ता में वृद्धि हो सके। लेकिन लापरवाही के कारण एटग्रेट की पुस्तकोंं सहित कई विषयों की अभ्यास पुस्तकें ,शेष पाठ्य पुस्तकें भण्डार गृह में ही रखी हुई हंै और पानी में गीली हो रही हैं।
यह डीपीसी की जिम्मेदारी है कि वे सभी स्कूलों में पुस्तकें पहुंचाना सुनिश्चित करें। इस संबंध में उनसे बात की जाएगी कि अभी तक पुस्तकें स्कूलों में क्यों नहीं पहुंची।
एसएल धुर्वे, प्रभारी डीइओ
Published on:
03 Oct 2022 11:56 pm
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