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गुड़ की मिठास ने लांघी सरहदें गाडरवारा में बरस रहा दिरहम, सरहदें लांघ गई मिठास

sweetness of Narsinghpur’s jaggery नरसिंहपुर.(प्रकाश चौबे) यूपी का मुजफ्फरनगर भले ही एशिया की सबसे बड़ी गुड़मंडी है। आंध्र प्रदेश के अमकापल्ली और महाराष्ट्र के कोल्हापुर की गुड़मंडी का बड़ा नाम है। लेकिन नरसिंहपुर के गुड़ की मिठास के आगे ये सब फीके हैं। गाडरवारा के जैविक गुड़ की दीवानगी पूरी दुनिया में बड़ी तेजी से […]

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यूपी का मुजफ्फरनगर भले ही एशिया की सबसे बड़ी गुड़मंडी है। आंध्र प्रदेश के अमकापल्ली और महाराष्ट्र के कोल्हापुर की गुड़मंडी का बड़ा नाम है। लेकिन नरसिंहपुर के गुड़ की मिठास के आगे ये सब फीके हैं। गाडरवारा के जैविक गुड़ की दीवानगी पूरी दुनिया में बड़ी तेजी से बढ़ रही है।

जिले में गन्ने से हर साल औसतन दो हजार करोड़ का कारोबार

sweetness of Narsinghpur's jaggery नरसिंहपुर.(प्रकाश चौबे) यूपी का मुजफ्फरनगर भले ही एशिया की सबसे बड़ी गुड़मंडी है। आंध्र प्रदेश के अमकापल्ली और महाराष्ट्र के कोल्हापुर की गुड़मंडी का बड़ा नाम है। लेकिन नरसिंहपुर के गुड़ की मिठास के आगे ये सब फीके हैं। गाडरवारा के जैविक गुड़ की दीवानगी पूरी दुनिया में बड़ी तेजी से बढ़ रही है। गुड़ की सफाई मेंजंगली जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल होता है। कढ़ाई में पकाने की पारपंरिक विधि इसे सुनहरा रंग और दानेदार स्वाद देती है। इसीलिए यहां के छोटे से गांव कोदसा और गोलगांव समेत दर्जनों गांवों का कस्टमाइज्ड गुड़ ग्रामीण इकोनॉमी की नयी कहानी लिख रहा है। मिडिल ईस्ट के देशों-सऊदी अरब,संयुक्त अरब अमीरात,कुवैत, कतर और ओमान के शेखों को यहां के गुड़ की मिठास इतनी भा गयी है कि इन दिनों यहां के बाजार में दिरहम, रियाल और दिनार की चर्चा हर ओर है। इन देशों में गुड़ ब्राउन डायमंड के रूप में बिकता है।
फ्लेवर और दानेदार गुड़ की पहचान
देश के अलग-अलग प्रांतों के अलावा दुबई, कनाडा, यूके और अफ्रीकी देशों में भी नरसिंहपुर के गुड़ के कद्रदान तेजी से बढ़े हैं। गुड़ में मिलाए जाने वाले अलग-अलग फ्लेवर और गुड़ की दानेदार क्वालिटी खूब पसंद आती है।


दो हजार करोड़ का कारोबार
नरसिंहपुर जिले में गुड़ का कारोबार करीब दो हजार करोड़ रुपए का है। इससे यहां के गन्ना किसानों, मजदूरों और व्यापारियों को तो लाभ हो ही रहा है। शासन को भी बड़ा राजस्व मिल रहा है। जिले में गन्ने का रकबा करीब 65 हजार हेक्टेयर है। और यहां आठ बड़ी शुगर मिलों के अलावा तीन खांडसारी मिले हैं। इन दिनों पूरे जिले में करीब 4 हजार गुड़ भट्टियां चल रही हैं।
गुड़ मंडियों को भी मोटी कमाई
जिले में प्रमुख गुड़ मंडी करेली है। इसके अलावा गाडरवारा, गोटेगांव और अन्य उपमंडियो में भी गुड़ की आवक होती है। करेली मंडी के सचिव एके मुद्गल ने बताया इस साल अब तक गुड़ मंडी को टैक्स के रूप में डेढ़ करोड़ मिले हैं। गुड़ से ही सालाना कमाई 8 करोड़ रुपए तक होती है। इसी तरह गाडरवारा मंडी, नरसिंहपुर मंडी की भी करोड़ों में कमाई होती है।
स्वाद की डिमांड
गाडरवारा तहसील के ग्राम गोलगांव में किसान व उद्यमी योगेश कौरव ने बताया कि वह करीब 35 फ्लेवर में गुड़ तैयार करते हैं। नरसिंहपुर के सभी गन्ना किसान गुड़ की सफाई मेंजंगली जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करते हैं। गुड़ पकाने के लिए कढ़ाई की पारपंरिक विधि प्रयोग में लाते हैं। इसलिए यहां के गुड़ की देश-दुनिया में डिमांड है। पैकिंग किया गुड़ मुंबई पोर्ट के जरिए किसान सीधे विदेश भेजते हैं। इसमें बिचौलियों की कोई भूमिका नहीं होती। दर्जनों किसानों ने मिडिल ईस्ट के व्यापारियों और शेखों से सीधे संपर्क कर रखा है। इसलिए मुनाफे में बढ़ोतरी हो रही है।
वर्जन
जिले में गन्ने से हर साल औसतन दो हजार करोड़ का कारोबार हो जाता है। जिससे किसान, मिलर्स, मजदूर, व्यापारी और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों को भी बड़ा लाभ मिलता है।
डॉ.अभिषेक दुबे, सहायक संचालक गन्ना, नरसिंहपुर