
The worship of this goddess meets liberation from skin diseases, boils
सांईखेड़ा। समीपस्थ ग्राम में झिरिया माता पर प्रतिवर्ष आषाढ़ मास और चैत्र मास की नवरात्रि पर मेला लगता है। जहां प्रतिवर्ष हजारों की तादाद में क्षेत्र एवं प्रदेश के कोने कोने से श्रद्धालु भक्त बारहमही माता पर पूजन अर्चन करने आते हैं। एक बुजुर्ग महिला गुलाब बाई कुशवाहा ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि जिस परिवार में पहले यदि किसी को फ ोड़े, फुन्सियां हो जाती थीं तो वो माता की पूजन अर्चन करने से ठीक हो जाती थीं। श्रद्धालु घर से वहीं आकर हलुआ पुड़ी का भोग बनाकर चढ़ाते हैं। उक्त भोग बिना नमक का होता है। वही परंपरा आज भी चली आ रही। चैत्र और आषाढ़ मास की चतुर्दशी तिथि पर यहां भारी भीड़ लगती है। पहले दूर दूर से लोग बैलगाड़ी और पैदल पहुंचकर मातारानी की पूजन अर्चन कर अपनी मनोकामना पूर्ण करते थे। अब लोग वाहनों से आते हैं, ग्राम पंचायत द्वारा आने जाने वाले श्रद्धालुओं को रहने ठहरने की व्यवस्था की जा रही है। उल्लेखनीय है बाराही माता को चर्मरोग, फोड़े, फुंसी के शमन करने वाली देवी माना जाता है। यदि किसी को उक्त रोग होते हैं तो कहा जाता था यह बाराही माता के प्रकोप से हुआ है।
साईंखेड़ा में चैत्र नवरात्र की धूम
दादा धूनीवालों की नगरी सांईखेड़ा में चैत्र नवरात्रि उत्सव बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। जगह-जगह लोगों ने अपने घरों में आस्था के प्रतीक जवारे बोए हैं। जिनके विसर्जन का सिलसिला आठें से चालू होकर पूर्णिमा तक चलेगा। वहीं प्राचीन खेड़ापति मंदिर में सुबह से महिलाएं, पुरुष बच्चों की जल ढारने लाइन लगी रहती है। खेड़ापति मंदिर पर नौ बजे रात्रि में महाआरती की जाती है। साथ ही नगर के सभी दुर्गा मंदिर भांति भांति से सजे हुए हैं। प्राचीन बंजारी माता मंदिर में भी लोग पूजन अर्चन कर जल चढ़ा रहे हैं एवं रात्रि के समय आरती, कीर्तन चल रहा है। जिससे नगर का वातावरण धर्ममय बना हुआ है।
Published on:
13 Apr 2019 06:48 pm
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