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TMC के 19 सांसदों की सूची, जिनके नाम लोकसभा स्पीकर कार्यालय को भेजे गए, देखिए लिस्ट

TMC Internal Crisis: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करने वाले 19 सांसदों के नाम सामने आ गया है, देखिए लिस्ट।

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TMC leaders List

TMC के 19 सांसदों की लिस्ट (ANI)

TMC MPs Name List: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कांग्रेस (TMC) से नाराज 19 सांसदों के नाम सामने आए हैं। इन सांसदों ने 18 मई को लोकसभा स्पीकर के कार्यालय को अपने नाम भेजे थे, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया पर लिस्ट वायरल हो रही है जिसमें सभी 19 सांसदों के नाम और उनके हस्ताक्षर देखने को मिल रहे है।

लोकसभा अध्यक्ष से सांसदों की मांग

बताया जा रहा है कि सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग संसदीय गुट को मान्यता देने की मांग की है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति और संसद में टीएमसी (TMC) की स्थिति पर बड़ा असर डाल सकता है।

TMC के लिए बड़ा झटका

सांसदों की इतनी बड़ी संख्या में नाराजगी पार्टी नेतृत्व के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। दल-बदल कानून के तहत किसी भी संसदीय दल के विभाजन को मान्यता पाने के लिए दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरुरी होते है। सूत्रों का दावा है कि 19 सांसदों का आंकड़ा इस कानूनी शर्त को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।

लोकसभा स्पीकर को भेजे गए 19 सांसदों के नाम की लिस्ट

  1. काकोली घोष दस्तीदार
  2. शताब्दी रॉय
  3. बापी हलदार
  4. डॉ. शर्मिला सरकार
  5. प्रसून बंद्योपाध्याय
  6. जगदीश बर्मा बसुनिया
  7. असित कुमार मल
  8. अरूप चक्रवर्ती
  9. रचना बनर्जी
  10. सायोनी घोष
  11. खलीलुर्रहमान
  12. अबू ताहिर खान
  13. यूसुफ पठान
  14. मिताली बैग
  15. माला रॉय
  16. कालीपद सोरेन
  17. दीपक अधिकारी
  18. जून मालिया
  19. पार्थ भौमिक

इस कथित बगावत में यूसुफ पठान, सायोनी घोष, शताब्दी रॉय और रचना बनर्जी जैसे चर्चित चेहरों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि इस घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।

लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी निगाहें

अब सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि बागी सांसदों के दावे को औपचारिक मान्यता मिलती है, तो टीएमसी (TMC) को संसद में अपनी ताकत के मामले में बड़ा झटका लग सकता है। साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना भी बढ़ जाएगी।