राष्ट्रीय

सीवर की सफाई के दौरान पांच साल में हुई 330 मौतें

- संसद में सवाल जवाब

less than 1 minute read
Jul 26, 2023
सीवर की सफाई के दौरान पांच साल में हुई 330 मौतें

नई दिल्ली। देश में पिछले पांच सालों के दौरान सीवर या सैप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैसों से दम घुटने से 330 सफाई कर्मचारियों की जान चली गई। सर्वाधिक 51 मौतें तमिलनाडू व 49 महाराष्ट्र में हुई। इन घटनाओं को लेकर देश के सभी राज्यों में 306 मृतकों के परिजनों को मुआवजे का भुगतान करने के साथ 249 मामले दर्ज किए गए हैं।

सामाजिक न्याय व आधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने बुधवार को राज्यसभा में बताया कि देश में 6 दिसम्बर 2013 से लागू एमएस अधिनियम के तहत हाथ से मैला ढोने पर पूरी तरह रोक लगाई जा चुकी है। इसके बाद किसी भी जिले में हाथ से मैला ढोने की घटना रिपोर्ट नहीं हुई है। देश के 530 जिलों को हाथ से मैला ढोने से मुक्त घोषित किया जा चुका है, बाकी 236 जिलों से रिपोर्ट नहीं मिली है। इस दौरान मैनुअल स्क्वेंजिंग से किसी की मौत होने की सूचना नहीं है, लेकिन सीवर की सफाई से मौतों के मामले सामने आते रहते हैं।

सीवर से मौतों के मामले में टॉप 5 राज्य

























तमिलनाडू51
महाराष्ट्र49
उत्तरप्रदेश46
हरियाणा44
दिल्ली35

बच्चे भी नहीं बचे मादक पदार्थों के अपराध से

नशीली दवाओं के अपराधों से जुड़े बच्चों की संख्या में पांच साल से लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। महिला व बाल विकास विभाग की ओर से राज्यसभा में एनसीआरबी की रिपोर्ट के आधार पर पेश आंकड़ों के अनुसार साल 2017 से 2021 तक ऐसे बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। साल 2017 में एनडीपीएस एक्ट के तहत 196 बच्चों के खिलाफ मामले दर्ज हुए, जबकि साल 2021 में यह संख्या 369 तक पहुंच गई। साल 2018 में 196, 2019 में 218 व साल 2021 में 264 बच्चों पर एनडीपीएस एक्ट मामले दर्ज हुए।

Published on:
26 Jul 2023 09:40 pm
Also Read
View All

अगली खबर