9 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

आज पहली बार भारत आ रहे अफगानी विदेश मंत्री, तालिबान के जरिए पाक पर नकेल कसने की तैयारी

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी भारत दौरे पर आ रहे हैं। मॉस्को फॉर्मेट में भी भारत ने तालिबान का समर्थन किया है। मुत्ताकी के भारत दौरे को लेकर जानिए क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट...

2 min read
Google source verification
Afghanistan's Foreign Minister Amir Khan Muttaqi

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी (फोटो- IANS)

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी आज भारत दौरे पर आ रहे हैं। मुत्ताकी संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में शामिल हैं। भारत की यात्रा के लिए उन्हें सुरक्षा परिषद से विशेष छूट मिली है।

यहां किससे मिलेंगे मुत्ताकी

भारत दौरे पर तालिबान के नेता मुत्ताकी भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर, भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे। अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि वह पीएम मोदी से मिलेंगे या नहीं। करीब चार साल पहले तालिबान ने अफगानिस्तान का शासन अपने हाथ में लिया था। इसके बाद वहां के किसी विदेश मंत्री का यह पहला भारत दौरा है। मुत्ताकी के दौरे को भारत-पाकिस्तान तनाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

क्यों है मुत्ताकी का दौरा अहम?

विशेषज्ञों के मुताबिक मुत्ताकी का भारत दौरा बेहद अहम है। भारत और तालिबान के बीच कूटनीतिक रिश्ते हाल के सालों में सुधरे हैं। भारत का हित अफगानिस्तान की स्थिरता में है। भारत ने अफगानिस्तान में भारी निवेश किया है। तालिबान भी यह बात समझ रहा है कि अफगानिस्तान में तालिबान को कंट्रोल करने के लिए पाकिस्तान ISKP (इस्लामिक स्टेट खुरासन प्रोविंस) का इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए पाकिस्तान को बैलेंस करने के लिए भारत और तालिबान आपसी सहयोग बढ़ा सकते हैं।

एक्सपर्ट्स ने कहा कि साल 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद भारत ने शुरुआत में उससे दूरी बनाई, लेकिन समय के साथ-साथ यह दूरी अब घटने लगी है। जून 2022 में भारत ने काबुल में एक तकनीकी मिशन खोला। इस साल दुबई में भारतीय विदेश सचिव ने तालिबान सरकार में विदेश मंत्री मुत्ताकी से मुलाकात की। मई महीने में भी पहलगाम हमले के बाद मुत्ताकी और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच फोन पर बातचीत हुई। हालांकि, भारत सरकार ने तालिबान को अभी तक मान्यता नहीं दी है, लेकिन रिश्ते पटरी पर लौट रहे हैं।

जानकारों ने कहा कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने जैश, लश्कर और हिज्बुल के आतंकी ठिकानों को अफगानिस्तान की सीमा के पास शिफ्ट किया है। खैबर पख्तूनख्वाह में पाकिस्तान जैश, लश्कर, हिज्बुल और ISKP का गठजोड़ बनाने में लगी हुई है। भारत चाहता है कि अफगानिस्तान किसी भी सूरत में भारत विरोधी आतंकवादियों की पनाहगाह न बने।

तालिबान के समर्थन में भारत

इधर, मॉस्को फॉर्मेट में तालिबान के समर्थन में भारत ने बयान दिया है। भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस योजना का विरोध किया है, जिसमें उन्होंने अफगानिस्तान से बगराम एयरबेस वापस लेने की बात कही थी। फॉर्मेट में साझा बयान में कहा गया कि किसी भी देश को अफगानिस्तान या उसके पड़ोसी देशों में अपनी सैन्य सुविधाएं बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए ठीक नहीं है। हालांकि, इसमें सीधे तौर पर बरगाम एयरबेस या अमेरिका का नाम नहीं लिया गया है।