
Stock Limit: केंद्र सरकार ने दालों के बाद अब गेहूं पर भंडारण सीमा (स्टॉक लिमिट) लगा दी है। यह सीमा तत्काल प्रभाव से लागू होगी और अगले साल 31 मार्च तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने यह कदम गेहूं की जमाखोरी रोकने के साथ ही इसके दाम नियंत्रित करने के लिए उठाया है। थोक कारोबारी 3,000 टन गेहूं का भंडारण कर सकेगा। प्रत्येक खुदरा कारोबारी अपने रिटेल आउटलेट पर 10 टन गेहूं रख सकता है। बिग चेन रिटेलर को प्रत्येक आउटलेट पर 10 टन और उनके सभी डिपो पर 3,000 टन गेहूं का भंडारण करने की अनुमति दी गई है। आटा मिल वाले वर्ष 2024-25 के बचे महीनों में अपनी स्थापित मासिक क्षमता के 70त्न तक गेहूं का भंडारण कर सकते हैं।
महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार का सबसे ज्यादा जोर उत्पादन और भंडारण क्षमता बढ़ाने पर है। स्टॉक जितना बड़ा होगा, जमाखोरी उतनी ही कम होगी। अभी देश में उत्पादित अनाज के सिर्फ 47त्न के भंडारण की ही सुविधा है। इसलिए पैक्स (प्राथमिक सहकारी समितियां) स्तर पर गोदाम बनाए जा रहे हैं। तैयारी 3 लाख गोदाम की है, जो विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना होगी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत 511 पैक्सों का चयन किया गया है।
चालू वर्ष के दूसरे अनुमान में बागवानी फसलों का उत्पादन 3522.30 लाख टन है, जो पिछली बार से लगभग 32.51 लाख टन कम है। सर्वाधिक कमी प्याज, आलू, बैंगन समेत अन्य सब्जियों की होनी है। आलू-प्याज के दाम तो अभी से सिरदर्द बनने लगे हैं। ऐसे में तात्कालिक उपायों पर फोकस के साथ स्थायी समाधान के रास्ते भी तलाशे जाने लगे हैं। प्याज 60 लाख टन और आलू का उत्पादन 34 लाख टन कम हो सकता है।
दाल में अब तक किए गए प्रयासों से उत्पादन में 14.02 लाख टन की वृद्धि हुई है। फिर भी मांग बढऩे के चलते आयात पर निर्भरता कम नहीं हुई है। सरकार ने अगले तीन वर्षों के दौरान दाल उत्पादन में पूरी तरह निर्भरता का लक्ष्य तय किया है। दलहन की फसल के लिए नए-नए क्षेत्र तलाशे जा रहे हैं। दाल की जमाखोरी रोकने के लिए तत्काल स्टॉक लिमिट लगा दी गई है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए उत्पादन बढ़ाने पर जोर है।
बाजार के अभाव में मौसमी फसलें देश के एक हिस्से में बर्बाद हो जाती हैं तो दूसरे हिस्से में वही फसल गायब रहती है। इसलिए भंडारण पर जोर है। प्याज के भंडारण सीमा को एक लाख टन से बढ़ाकर 5 लाख टन किया गया है। खेती के दायरे का विस्तार किया जा रहा है। प्याज की खेती में महाराष्ट्र का वर्चस्व टूटने लगा है। गुजरात और राजस्थान में इसकी खेती ने जोर पकड़ा है। दालों को भी इसी रास्ते पर लाने की तैयारी है। नए क्षेत्रों में दलहन की खेती की संभावना तलाशी जा रही है।
उपभोक्ता सचिव निधि खरे ने कहा कि तुअर और चना दाल पर स्टॉक लिमिट का असर दिखने लगा है और होलसेल दामों में 50 रुपए से लेकर 250 रुपए तक की गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि इसका असर जल्दी ही खुदरा बाजार में भी दिखेगा। निधि खरे ने कहा कि हीटवेव ने आलू प्याज टमाटर पर असर डाला है। मंडियों में हरी सब्जियां कम आने के चलते आलू के दामों में बढोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि अब मानसून आने के के बाद आलू के दामों में आएगी। इसके अलावा जुलाई में टमाटर और प्याज के दाम भी कम होंगे।
Published on:
25 Jun 2024 09:36 am
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