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Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव में ओवैसी-कबीर की पार्टी का हुआ गठबंधन, ममता बनर्जी की बढ़ी सियासी चुनौती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर का गठबंधन चर्चा में है। AIMIM और जनता उन्नयन पार्टी की एंट्री से ममता बनर्जी की टीएमसी के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है, खासकर मुस्लिम वोट बैंक को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो सकता है।

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भारत

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Anurag Animesh

Mar 22, 2026

Asaduddin Owaisi,Humayun Kabir

Asaduddin Owaisi, Humayun Kabir

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव से पहले हलचल तेज होती जा रही है। इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। ओवैसी ने हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान ऐलान किया कि उनकी पार्टी AIMIM पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर की पार्टी जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। ईद के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में ओवैसी ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उनका कहना था कि बंगाल में मुस्लिम आबादी करीब 30 फीसदी है, लेकिन उन्हें उनके अनुपात के हिसाब से हिस्सेदारी नहीं मिलती। उन्होंने आरोप लगाया कि “धर्मनिरपेक्षता” के नाम पर वोट तो लिए जाते हैं, मगर अधिकार देने की बात आते ही चुप्पी छा जाती है।

Asaduddin Owaisi: क्या कहा ओवैसी ने?


ओवैसी ने यह भी कहा कि उनकी कोशिश सिर्फ चुनाव लड़ने की नहीं, बल्कि अपनी पार्टी की आवाज को मजबूत करने की है। उनके मुताबिक, अगर समाज के किसी बड़े वर्ग को बराबरी का हक नहीं मिलता, तो उस मुद्दे को उठाना जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ, हुमायूं कबीर भी इस चुनाव में पूरी तैयारी के साथ उतर चुके हैं। उनकी पार्टी जनता उन्नयन पार्टी अब तक 182 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है। खुद कबीर बेलडांगा और रेजीनगर से चुनाव लड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर सीट से पूनम बेगम को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

Bengal Election 2026: हुमायूं कबीर टीएमसी से हुए थे बाहर


कभी तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा रहे हुमायूं कबीर को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर का रास्ता दिखाया गया था। अब वे उसी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और खासतौर पर मुस्लिम वोट बैंक में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य में इस बार चुनाव दो चरणों में होने हैं। मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा, जबकि नतीजे 4 मई को सामने आएंगे। अभी नामांकन प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी और गठबंधनों की हलचल ने माहौल पहले ही गर्म कर दिया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि ओवैसी और कबीर की यह नई राजनीतिक साझेदारी क्या वाकई ममता बनर्जी की राह मुश्किल बनाती है, या फिर यह सिर्फ चुनावी शोर बनकर रह जाती है।