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बंगाल पंचायत चुनाव में गोलियों की एंट्री, कांग्रेस कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या, केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग

West Bengal Panchayat Election : मुर्शीदाबाद के खारग्राम में एक कांग्रेस कार्यकर्ता की हत्या हो गई थी। इस पर कांग्रेस ने टीएमसी पर खून की राजनीति करने का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने मांग की है कि पंचायत चुनाव के दौरान राज्य में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती कराई जाए, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें।

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West Bengal Panchayat Election : जिस तरह विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में हिंसा का दौर शुरू हुआ था, ठीक उसी तरह पंचायत चुनाव को लेकर भी हिंसा तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस को चिट्ठी लिखकर चुनाव के दौरान केंद्रीय बलों की तैनाती हो इसकी मांग की है। कल पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के खारग्राम इलाके में कांग्रेस के एल सक्रिय कार्यकर्ता की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जिसको लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। बता दें कि, पश्चिम बंगाल में 8 जुलाई को पंचायत चुनाव होने हैं। इसी हत्या को लेकर कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा- पंचायत चुनाव होने वाला है, यहां दुसरे दलों के वोटरों में डर का माहौल बने इसीलिए यह हुआ है।


प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाया

अधीर इस निर्मम हत्या से काफी आहत दिखे। उन्होंने इस हत्या में खारग्राम प्रशासन पर भी आरोप लगाया।उनका कहना था की- आरोपी को खारग्राम प्रशासन का संरक्षण मिला, जिससे उसका मनोबल बढ़ा और फिर बाद में इस हत्या को अंजाम दिया गया। हम इसे लेकर प्रदर्शन करेंगे।

आगे उन्होंने कहा - तृणमूल कांग्रेस बुलेट निर्वाचन चाहती है या बैलेट निर्वाचन?ये स्पष्ट करे, हम तृणमूल कांग्रेस को बंगाल की जमीन पर खून की राजनीति नहीं करने देंगे। यह बात तो सही है कि बंगाल में एक भी चुनाव बिना हिंसा के संपन्न नहीं हो पाता है। कई बेगुनाह को चुनाव के दौरान अपना जान गंवाना पड़ता है।

अधीर रंजन ने चिट्ठी में क्या लिखा ?

कांग्रेस सांसद अधीर रंजन ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस को जो चिट्ठी लिखी है, उसमें यह कहा गया है- मौजूदा समय में बंगाल में जंगलराज चल रहा है,गुंडे बदमाश कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहे हैं, जिसमें सत्तासीन पार्टी के कार्यकर्ता विपक्षी कार्यकर्ताओं का शैतानों की तरह शिकार कर रहे हैं। गोली चलाने वालों को सरकार और राज्य के प्रशासन का संरक्षण प्राप्त है। हर गली-नुक्कड़ में डर का महल है। लोकतंत्र के आदर्शों को सत्ता पर काबिज पार्टी द्वारा कब्र में दफना दिया गया है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में हमें डर लग रहा है कि त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराना एक दूर की कौड़ी ही रह जाएगा।विधानसभा चुनाव के दौरान क्या हुआ था ये सबने देखा, इसीलिए हम चाहते हैं की इस बार कोई ठोस कदम उठाया जाए। इस बाबत हम आपसे अनुरोध करते हैं कि इन चुनावों को केंद्रीय सुरक्षाबलों की निगरानी में कराया जाए। इस मामले में आपकी ओर से कदम उठाया जाना अपेक्षित है।

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