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Lok Sabha Elections 2024: बंगाली अस्मिता और भ्रष्टाचार बन रहे चुनावी मुद्दे, बीजेपी और टीएमसी से लिए आसान नहीं राह

Lok Sabha Election 2024 West Bengal BJP TMC: पश्चिम बंगाल में 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी थी। चुनाव से पहले कई सर्वेक्षणों ने तो सत्ता की चाबी भाजपा को दे दी थी, लेकिन 294 विधानसभा सीटों में से 77 पर संतोष करना पड़ा। पढ़िए देवेंद्र गोस्वामी का विशेष लेख...

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narendra modi mamata banerjee lok sabha elections 2024

Lok Sabha Election 2024 West Bengal BJP TMC: पूरी दुनिया में शांति निकेतन का नाम प्रसिद्ध है। बंगाल को सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे ले जाने के कारण कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर को पूरे बंगाल में गुरु और ठाकुर का दर्जा प्राप्त है। बंगला में ठाकुर का मतलब भगवान होता है। पश्चिम बंगाल को समझने के लिए मैं बीरभूम जिले में बोलपुर पहुंचा। रात 2 बजे बोलपुर स्टेशन पर उतरा तो वहां रविंद्र दा की कलाकृति पूरे परिसर में दिख रही थी। छोटे से स्टेशन के बाहर चहल-पहल थी, पूछने पर एक ऑटो वाले ने बताया कि दुनियाभर के साहित्य और कला प्रेमी यहां आते हैं। सुबह शांति निकेतन यानी विश्व भारती विश्वविद्यालय पहुंच गए। एक किलोमीटर के रास्ते में पैदल चलते विद्यार्थी, साइकिल से आते-जाते स्थानीय लोग और कुछ मोटर गाडिय़ां नजर आईं।

विश्वविद्यालय के फर्स्ट गेट के बाहर कुल्हड़ की चाय के साथ वहां मिले छात्र नेता सोमनाथ साव। उनसे राज्य के हालात पर चर्चा शुरू हुई। कहने लगे कोई भी पार्टी लोगों का जीवन स्तर सुधारने की दिशा में कार्य नहीं कर रही है। नया निवेश नहीं हो रहा है। चर्चा में पास खड़े असित दास बोले- जिस टैगोर ने पूर्वी और पश्चिमी दुनिया के बीच सेतु बनने का काम किया था, उन्हें अब भुलाया जा रहा है। जितना काम यहां होना चाहिए था, वह हो नहीं पाया। सारे संसाधन होने के बाद भी प. बंगाल बीमारू राज्यों की श्रेणी में शामिल होता जा रहा है।


यूनेस्को ने पिछले साल 17 सितंबर को शांति निकेतन को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था। इसके बाद विश्व भारती विश्वविद्यालय में पट्टिकाएं लगाने पर विवाद हो गया था। कई जगह लगी पट्टिका में पदेन कुलाधिपति प्रधानमंत्री और कुलपति का नाम है, लेकिन विश्वविद्यालय की स्थापना करने वाले रविंद्र नाथ टैगोर का उल्लेख नहीं होने पर विरोध होने लगा।


विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा जिस तरह से आक्रमक थी, अब ऐसा माहौल नहीं है। प्रतीक चटर्जी बोले-तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ बंगाली अस्मिता को हथियार बनाया है। रविंद्र नाथ टैगोर को नजरअंदाज करने का मामला हो या अमत्र्य सेन के खिलाफ नोटिस, इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। प. बंगाल में इन दोनों नोबेल विजेताओं का बहुत सम्मान है।

इनका अपमान कोई भी बंगाली बर्दाश्त नहीं करेगा। इस वजह से तृणमूल खुलकर मैदान में है। वहीं भाजपा के बंगाली नेता इस पर अपनी राय व्यक्तकरने से बच रहे हैं। सारा पत्राचार और बयानबाजी विश्वविद्यालय प्रशासन और तृणमूल नेताओं के बीच हो रही है। विधानसभा चुनाव में भी तृणमूल की जीत का प्रमुख बंगाली अस्मिता का मुद्दा ही रहा।


छात्र राजनीति से जुड़े सोमनाथ ने बताया कि यहां की जनता किस तरफ जाएगी, यह तय नहीं है। संगठन को मजबूत बनाने के लिए भाजपा को यहां की संस्कृति को आदर देना होगा। अभी भाजपा को लेकर यह चर्चा है कि टीएमसी में जब तक कोई नेता है तो वह भ्रष्ट है, लेकिन भाजपा में जाते ही साफ हो जाता है। सुकांत ने कहा कि राज्य में सबसे बड़ा मद्दा भ्रष्टाचार है। पहले राज्य सरकार किसानों से सीधे अनाज खरीदती थी अब एजेंटों के माध्यम से खरीदी हो रही है। हर काम में कमीशनखोरी हो रही है।


पश्चिम बंगाल में 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी थी। चुनाव से पहले कई सर्वेक्षणों ने तो सत्ता की चाबी भाजपा को दे दी थी, लेकिन 294 विधानसभा सीटों में से 77 पर संतोष करना पड़ा। हालांकि भाजपा तृणमूल के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और 37.97 प्रतिशत वोट पाने में सफल हुई। विपक्ष के रूप में भाजपा राज्य सरकार को घेरने का प्रयास कर रही है। भाजपा का सभी जिलों में अभी संगठन तैयार नहीं हो पाया है। विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल ने खुद को और मजबूत करने का प्रयास किया। इसका असर लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।


प. बंगाल में 34 साल तक सरकार चलाने वाला वाम मोर्चा अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। पिछले लोकसभा और विधानसभा में एक सीट भी नहीं जीत पाने के कारण अब पार्टी की चर्चा भी नहीं होती। बोलपुर में मिले निजामुतुल्ला ने बताया कि लेफ्ट पार्टियों के नेता अब जाग रहे हैं।

कई शहरों में इनके पार्टी ऑफिस फिर से खुल रहे हैं। फिलहाल लेफ्ट का यूथ विंग सक्रिय हो रहा है। यह पार्टी के लिए अच्छा संकेत है। वहीं कांग्रेस के लिए भी स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती। फिलहाल दो सीटें हैं, लेकिन जनाधार नहीं बढ़ा है। कांग्रेस का भविष्य अब तृणमूल के साथ होने वाले गठबंधन पर टिका है।


व्यवसायी धीरेन दास ने कहा कि ममता बनर्जी सीधे लोगों से जुड़कर बात करती हैं। वे भाषण नहीं देतीं। हर सप्ताह किसी क्षेत्र में जाती हैं और महिलाओं से सीधे संवाद करने लगती हंै। महिलाओं के नाम पर कई योजनाएं चला रखी हैं, जिनका सीधा लाभ मिल रहा है। लक्ष्मी भंडार स्कीम के तहत परिवार की महिला मुखिया को वित्तीय सहायता दी जाती है। हाल ही में इस योजना को स्कॉच पुरस्कार मिला है। तृणमूल के किले में सेंध लगाने के लिए भाजपा को बहुत मेहनत करनी होगी।