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कैसे करें बैंकों पर भरोसा! कस्टमर के नाम पर बैंक मैनेजरों ने किया 30 करोड़ का लोन फ्रॉड

बैंक ऑफ महाराष्ट्र के मैनेजरों ने चेक और कई दूसरे जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके केरल के एक शख्स के साथ 30 करोड़ की धोखाधड़ी की है। इस मामले में पीड़ित शख्स ने CBI जांच की मांग करते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को चिट्ठी लिखी है।

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भारत

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Pushpankar Piyush

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Mohammad Hamid

Nov 08, 2025

बैंक फ्रॉड (फोटो-IANS)

Big Bank Fraud Exposed: केरल के एर्नाकुलम जिले में कोलेनचेरी के रहने वाले एल्डहो पॉल के साथ इतना बड़ा धोखा हो जाएगा, उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था। एल्डहो को बैंक ऑफ महाराष्ट्र के मैनेजरों ने चेक और कई दूसरे जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके कथित तौर पर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का शिकार बनाया है।

क्या है लोन फ्रॉड

49 साल के एल्डहो पॉल एक छोटे कॉन्ट्रैक्टर हैं, उन्हें कोच्चि स्थित बैंक की शाखा के अधिकारियों की ओर से की गई धोखाधड़ी का पता तब चला जब उनकी संपत्ति एर्नाकुलम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट में ज़ब्ती की कार्यवाही में आई। तभी उन्हें ये भी पता चला कि उनके जाली हस्ताक्षर वाला एक नकली गारंटी समझौता जमा किया गया है।

एल्डहो के लिए ये सब कुछ बेहद परेशान करने वाला था, उन्हें इसके बारे में कुछ पता नहीं था। एल्डहो ने कहा कि अदालती कार्यवाही शुरू होने तक न तो मेरा बैंक में कोई खाता था और न ही मुझे पता था कि मेरी प्रॉपर्टी लोन के लिए गिरवी रखी गई है।

कैसे हुआ लोन फ्रॉड

यह सब 2023 में शुरू हुआ, जब एल्डहो पैसों की किल्लत से जूझ रहे थे। उसी समय कुछ एजेंटों ने एल्डहो से संपर्क किया, जो कि ये संदिग्ध मैनेजर्स से जुड़े हुए थे। उन्होंने एल्डहो से कहा कि वो उसे 1 करोड़ रुपये का लोन दिलाने में मदद कर सकते हैं। अपने खुद के CIBIL स्कोर की दिक्कतों का हवाला देते हुए बैंक के सर्किल मैनेजर और पजमथोट्टम निवासी शिबू जैकब और इसकी कई शाखाओं के मैनेजर अरुण ने उन्हें लोन की व्यवस्था करने का भरोसा दिया और प्रॉपर्टी के पेपर्स भी मांगे। उस वक्त एल्डहो को पैसों की सख्त जरूरत थी, सामने से इस तरह का ऑफर आया जिसने एल्डहो का भरोसा जीत लिया। उन्होंने एल्डहो से स्टाम्प पेपर्स और ब्लैंक चेक ले लिए और 30 लाख रुपये का लोन जारी कर दिया। तब तक एल्डहो को ये अंदाजा भी नहीं था कि उनके साथ क्या होने जा रहा है।  

अंग्रेजी अखबार The New Indian Express के साथ बातचीत में एल्डहो ने बताया 'मैंने कई ट्रांजैक्शन के जरिए पूरा लोन चुका दिया; मेरे पास सारे रिकॉर्ड हैं। बाद में मुझे पता चला कि उन्होंने मेरे प्रॉपर्टी पेपर्स का इस्तेमाल करके बैंक की कक्कनड शाखा से 30 करोड़ रुपये का लोन लिया है। संदिग्धों ने मेरी जानकारी के बिना ही संपत्ति का लोकेशन स्केच, टैक्स रसीदें और पजेशन सर्टिफिकेट भी हासिल कर लिया।'

दूसरे लोग भी शिकार हुए

उन्होंने कहा कि उनकी गिरवी रखी गई प्रॉपर्टीज की मार्केट वैल्यू 12 करोड़ रुपये से ज़्यादा नहीं होगी और बैंक आमतौर पर इसे 7-8 करोड़ रुपये के बीच मानते हैं। फिर भी, इन लोगों ने 30 करोड़ रुपये का लोन हासिल कर लिया। एल्डहो ने आरोप लगाया कि जालसाज़ों ने जेनी वर्गीज, जीबा जेनी और जीनू वर्गीस, जो कंजीरावेलिल ट्रेडर्स और जेनुइन स्पाइसेज़ जैसे नामों से चल रही कंपनियों के मालिक हैं, उनके जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करके बैंक ऑफ महाराष्ट्र की कई शाखाओं से 120 करोड़ रुपये का गबन किया है।

इस पूरे मामले पर पुथेनक्रूज़ पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर ने कहा, "अदालत की मंजूरी के बाद मामला दर्ज किया गया है और जांच चल रही है। शुरुआती जांच से पता चलता है कि बैंक ने एक इंटरनल जांच भी शुरू कर दी है।"

इधर, एल्डहो ने CBI जांच और हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच की मांग करते हुए कहा है कि उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक चिट्ठी सौंपी है। एर्नाकुलम ग्रामीण पुलिस ने बताया कि धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और जालसाजी सहित कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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