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द्वारका एक्सप्रेसवे के निर्माण में गड़बड़झाला, सरकार पर लगे गंभीर आरोप, CAG का खुलासा

Dwarka Expressway Cost CAG Report: दिल्ली को गुरूग्राम से जोड़ने वाले द्वारका एक्सप्रेसवे के निर्माण में आए खर्च को लेकर भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) ने बड़ा खुलासा किया है। इसके बाद से विपक्ष हमलावर है। आइये जानते हैं पूरा विवाद क्या है...

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द्वारका एक्सप्रेसवे के निर्माण में गड़बड़झाला, सरकार पर लगे गंभीर आरोप, CAG का खुलासा

द्वारका एक्सप्रेसवे के निर्माण में गड़बड़झाला, सरकार पर लगे गंभीर आरोप, CAG का खुलासा

Dwarka Expressway Cost CAG Report: दिल्ली को गुरुग्राम से जोड़ने वाले द्वारका एक्सप्रेसवे को लेकर भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैबिनेट द्वारा इस एक्सप्रेसवे के लिए 18 करोड़ 20 लाख प्रति किमी. का बजट पास हुआ था, लेकिन नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) ने इसका बजट करीब 251 करोड़ प्रति किमी के हिसाब से पास किया। कैबिनेट द्वारा पास हुए बजट और NHAI द्वारा पास हुए बजट में अंतर करीब 14 गुना का है। अब इसी को लेकर सवाल होने शुरू हो गए हैं।


रिपोर्ट में क्या कहा गया?

इस रिपोर्ट में भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) ने कहा कि एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए कैबिनेट ने 18 करोड़ 20 लाख रुपये प्रति किलोमीटर की दर से बजट आवंटित किया था, लेकिन NHAI ने इसके लिए 250.77 यानी लगभग 251 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की दर से बजट आवंटित कर दी। रिपोर्ट में कहा गया कि आवंटित की गई राशि से कई गुना अधिक थी।

केजरीवाल बोले- भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड टूटे

जैसे ही इस मामले का खुलासा हुआ विपक्ष हमलवार हो गई। इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक फोटो साझा करते हुए कहा है कि "मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार के 75 वर्ष के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।" बता दें कि द्वारका एक्सप्रेस-वे का निर्माण दिल्ली से गुरुग्राम को जोड़ने के लिए किया जा रहा है। भारतमाला परियोजना के तहत इस परियोजना का विकास दिल्ली और गुरुग्राम के बीच नेशनल हाईवे 48 के समानांतर किया जा रहा है ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग पर गाड़ियों की भीड़ की भीड़ में कमी आ सके।


केंद्र सरकार ने रिपोर्ट पर क्या कहा?

नितिन गडकरी के मंत्रालय ने CAG के सवाल पर जवाब देते हुए कहा "द्वारका एक्सप्रेसवे को अंतर-राज्यीय यातायात की सुचारू आवाजाही की अनुमति देने के लिए न्यूनतम प्रवेश निकास व्यवस्था के साथ आठ-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया था, जिसके कारण लागत बढ़ गई।" मंत्रालय से आए जवाब पर CAG ने कहा कि औसत दैनिक यातायात के लिहाज से 8 लेन के निर्माण की कोई जरुरत नहीं थी।