2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नौकरियों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार सहकारी समितियों की बढ़ा सकती है भूमिका

नौकरियों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार सहकारी समितियों की भूमिका बढ़ा सकती है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में इसके बारे में सभी राज्यों को पत्र लिखकर जल्दी ही विचार करने की मांग की है।

2 min read
Google source verification
central-government-can-increase-the-role-of-cooperatives-to-promote-jobs.jpg

Central government can increase the role of cooperatives to promote jobs

केंद्र की मोदी सरकार नए मॉडल के तहत नौकरियों को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण सहकारी समितियों के द्वारा की जा रही आर्थिक गतिविधियों के दायरे को बढ़ाने की योजना बनाई है, जिसका एक डॉफ्ट राज्यों को भेजा गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार इसके जरिए नौकरियों को बढ़ावा देना चाहती है। बताया जा रहा है कि गृह मंत्री अमित शाह जो वर्तमान में सहकारिता के प्रभारी भी हैं उन्होंने हाल ही में सभी राज्यों को पत्र लिखकर इस मामले में जल्दी विचार करने की मांग की है। इसके जरिए केंद्र सरकार हर व्यावसायिक किसान को देश में पंचायत स्तर पर एक सहकारी समिति से जोड़ना चाहती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत में लगभग 95,000 प्रायमरी एग्रीकल्चर ऋण समितियां (Primary Agricultural Credit Society) हैं, जिनमें 300 मिलियन सदस्य हैं। इस क्षेत्र का देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 20% का योगदान है।


कृषि ऋण प्रदान करना

आपको बता दें कि सहकारी समितियां छोटे उत्पादकों का समूह हैं जो मार्केट में पैमाने पर सामूहिक सौदेबाजी करते हैं। पैक्स सदस्य द्वारा संचालित अंतिम मील की ग्रामीण वित्तीय संस्थाएं हैं जो एक ऐसे देश में कृषि ऋण प्रदान करती हैं जहां लगभग आधी आबादी कृषि की आय पर निर्भर करती है।


देश में बेरोजगारी दर 7.80%

आर्थिक थिंक-टैंक सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी ने अपने आकड़े जारी करते हुए बताया था कि कृषि क्षेत्र में लगभग 13 मिलियन नौकरियों के नुकसान के साथ देश में बेरोजगारी दर 7.80% है। यह आकड़े पिछले महीने जून में जारी किए गए थे। इसमें बताया गया है कि देश में कुछ प्रतिष्ठित सहकारी व्यवसाय जैसे डेयरी, अमूल, पापड़-निर्माता लिज्जत पापड़, और उर्वरक प्रमुख इफको हैं जो अक्षमताओं और अपारदर्शी संरक्षण प्रणालियों से घिरे हुए हैं।


लेखाकारों और तकनीकी पेशेवरों की आवश्यकता

एक उद्धृत अधिकारी ने कहा कि नई आर्थिक गतिविधियों के साथ सहकारिता ग्रामीण समृद्धि को बढ़ावा दे सकती है। इसके जरिए लेखाकारों और तकनीकी पेशेवरों की आवश्यकता होगी। यह ज्यादातर स्थानीय रोजगार होंगे।