
स्वाधीनता आंदोलन के 'पांच पांडवों' में सबसे बड़े पांडव माने जाते थे वामनराव लाखे
रायपुर. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. पंडित वामनराव लाखे को छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन का अगुवा माना जाता है। वामनराव लाखे के प्रयासों से ही रायपुर में प्रथम सहकारी बैंक की स्थापना 1913 में हुई। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वतंत्रता सेनानी लाखेजी की जयंती 17 सितम्बर पर उन्हें नमन किया है।
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वामनराव बलिराम लाखे का जन्म 17 सितम्बर 1872 में हुआ। उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि लाखे जी ने अपना कार्य क्षेत्र सहकारी आंदोलन को बनाया। किसानों की आर्थिक सुदृढ़ता और सहकारी संगठनों की मजबूती के लिए वे जीवनपर्यन्त कार्य करते रहे। सहकारिता के क्षेत्र में किए गए उनके प्रयासों का लाभ आज छत्तीसगढ़ में लाखों किसानों को मिल रहा है।
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वामनराव लाखे ने छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जनजागरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। छत्तीसगढ़ की प्रथम मासिक पत्रिका 'छत्तीसगढ़ मित्र' का प्रकाशन कर उन्होंने यहां पत्रकारिता की बुनियाद रखी। माधवराव सप्रे इस पत्रिका के संपादक थे। राष्ट्रीय चेतना के विकास में इस पत्रिका ने प्रमुख भूमिका निभाई।
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बता दें कि महात्मा गांधी ने 1930 में जब आंदोलन शुरू किया तो रायपुर में इसका नेतृत्व वामनराव लाखे, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, मौलाना रऊफ़, महंत लक्ष्मीनारायण दास और शिवदास डागा ने किया था। ये पांचों रायपुर में स्वाधीनता आंदोलन में 'पांच पांडव' के नाम से विख्यात हो गए थे और वामनराव लाखे को इनमें सबसे बड़ा पांडव कहा जाता था।
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Published on:
16 Sept 2020 11:11 pm

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