DAP Price Soaring in India: चीन ने उर्वरक और रेयर अर्थ को लेकर सख्ती कर दी है जिसके चलते भारत में उर्वरक संकट गहरा गया है। डीएपी की कीमतें प्रति टन 100 डॉलर बढ़ चुकी है।
DAP Shortage in India: उर्वरकों के निर्यात पर चीन की सख्ती के कारण भारत में पानी में घुलने वाले उर्वरकों की आपूर्ति पर ही फर्क नहीं पड़ा है, बल्कि जमकर इस्तेमाल होने वाले डाई अमोनिया फॉस्फेट (डीएपी) के दाम भी चढऩे लगे हैं। डीएपी के दाम 800 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गए हैं। इससे चालू वित्त वर्ष के लिए केंद्र का सब्सिडी का गणित गड़बड़ा सकता है और आयात करने वाली कंपनियों के मार्जिन को भी चोट लग सकती है।
डीएपी के खुदरा दामों में सब्सिडी का बड़ा हिस्सा होता है। वर्ष 2024-25 में देश में करीब 46 लाख टन डीएपी का आयात हुआ, जिसमें चीन की हिस्सेदारी केवल 8.5 लाख टन यानी 18.4 फीसदी रही जो 2023-24 में 39.2 प्रतिशत रही थी। यानी दो साल में चीन से डीएपी आयात करीब 61.3 फीसदी घटा है।
जनवरी में डीएपी का मूल्य करीब 633 डॉलर प्रति टन (लागत और मालभाड़ा सहित) था, जो जून में बढ़कर 780 डॉलर प्रति टन हो गया। भारत में यूरिया के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल डीएपी का ही होता है। सालाना 100 से 110 लाख टन खपत में 50-60 लाख टन आयात होता है। डीएपी में इस्तेमाल होने वाली फॉस्फोरस और अमोनिया जैसे कच्चे माल का भी आयात करना पड़ता है। आयातित फॉस्फोरस का भाव 10 डॉलर प्रति टन बढ़ने पर तैयार डीएपी का आयात मूल्य 5 डॉलर प्रति टन बढ़ जाता है। वहीं अमोनिया की कीमत 30 डॉलर प्रति टन बढ़ने पर डीएपी का दाम 12 डॉलर प्रति टन चढ़ जाता है।
जानकारों का कहना है कि चीन के स्पेशिएलिटी फर्टिलाइजर्स की सप्लाई रोकने से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसकी कमी से फलों, सब्जियों और फसल की उत्पादकता, क्वालिटी और किसानों की इनकम असर हो सकता है। भारत सालाना 6 लाख टन स्पेशिएलिटी फर्टिलाइजर्स का आयात करता है। इसमें से 80 फीसदी आयात डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चीन से होता है। व्यापारियों ने बताया कि चीन से डीपीए का आयात घटने पर भारत ने उसकी भरपाई के लिए पश्चिम एशिया खासतौर पर सऊदी अरब का रुख कर लिया। लेकिन ईरान और इजरायल की जंग से होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण आयातित डीएपी के दाम बढ़ गए हैं।