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जम्मू कश्मीर में आतंकी साफ करने उतरे खास कमांडो, लादेन को मारने वाली अमरीकी मरीन से भी हैं खतरनाक

जम्मू और कश्मीर के राजौरी के जंगलों में चार दिनों से लगातार आतंकियों की तलाश जारी है। सोमवार को आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में तीन जवान घायल हो गए थे।

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जम्मू और कश्मीर के राजौरी के जंगलों में चार दिनों से लगातार आतंकियों की तलाश जारी है। सोमवार को आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में तीन जवान घायल हो गए थे। इसमें से दो पैरा कमांडों बताए जा रहे हैं। जम्मू कश्मीर पुलिस सूत्र आतंकियों के अभी भी कालाकोट के तातापानी जंगल में आतंकियों के होने की आशंका जता रहे हैं। ऐसे में इस आतंकियों की तलाश जारी है।

भारतीय सेना ने अब इन आतंकियों को विनाश करने के लिए कोबरा कमांडो उतार दिए हैं। इससे पहले यहां ड्रोन और हेलीकॉप्टर की मदद से इन आतंकियों की तलाश की गई लेकिन आतंकियों को कोई सुराग नहीं लगा। इसके बाद जंगल आतंकी तलाश का काम गृह मंत्रालय ने कोबारा कमांडो की यूनिट का सौंप दिया। इन्हें हाल की में जम्मू कश्मीर की सरजमीं कुपवाड़ा में ट्रेंड किया है। राजौरी में यह इनका पहला आपरेशन है।

पुंछ में भी सर्च
आतंकी गतिविधियों को देखते हुए जम्मू कश्मीर पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और भारतीय सेना ने संयुक्त तलाशी अभियान चला रहा है। मौसम में तेजी से बदलाव को देखते हुए गश्त बढ़ा दी गई है। पुंछ के खनेतर टाप के जंगलों में भी आतंकियों की तलाश की जा रही है।

कौन हैं ये कोबरा कमांडों?
सीआरपीएफ की विशेष गुरिल्ला युद्धक इकाई है। झारखंड के नक्सलियों से लेकर पूर्वोत्तर के उग्रवादियों तक का सफाया कर चुके CoBRA बटालियन के जवान जंगल युद्ध और गुरिल्ला युद्ध में बेहद प्रवीण माने जाते हैं। इतना प्रवीण की उनके आगे अमरीकी मरीन फोर्स नहीं टिकती और ब्रिटिश विशिष्ट कमांडो दस्ता'एसएएस' बस एक कदम ही पीछे हैं। यह 11 दिनों तक बिना किसी मदद के 23 किलो वजन के साथ युद्ध लड़ सकती है। 2008 से 2011 के बीच गृह मंत्रालय ने आदेश पर 10 कोबरा इकाई तैयार की गई थी।