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क्या है महाराष्ट्र स्पेशल पब्लिक सिक्योरिटी एक्ट ? रोक लगाने के लिए कांग्रेस-CPI ने हाई कोर्ट का खटखटाया दरवाजा ? उद्धव-शरद पीछे क्यों हटे

Congress CPI challenged Act: महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2025 को अवैध और असंवैधानिक' बताते हुए बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। कांग्रेस, सीपीआई और वरिष्ठ नेताओं ने यह अपील की है।

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भारत

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MI Zahir

Jun 19, 2026

Bombay High Court News

बॉम्बे हाई कोर्ट। ( फोटो: ANI)

Congress and CPI Filed Petition: कांग्रेस, सीपीआई और वरिष्ठ नेताओं ने महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम, 2025 को अवैध और असंवैधानिक' बताते हुए बंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इस याचिका में दावा किया गया है कि यह अधिनियम संगठनों पर प्रतिबंध लगाने और असहमति को दबाने के लिए व्यापक शक्तियां प्रदान करता है। ध्यान रहे कि सन 2024 का यह विधेयक महाराष्ट्र विधानसभा ने सन 10 जुलाई 2025 को और विधान परिषद ने अगले दिन पारित किया गया था। इसे दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी, जिसे केवल कांग्रेस और सीपीआई ने बंबई हाईकोर्ट में चुनौती दी है। यक्ष प्रश्न यह है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी शिव सेना और शरद पवार की पार्टी एनसीपी इस बिल के खिलाफ क्यों नहीं जा रहे हैं, उन्होंने इस बिल को हाईकोर्ट में चुनौती क्यों नहीं दी।


स्पेशल एक्ट के खिलाफ अपील से उद्धव ठाकरे व शरद पवार क्यों पीछे हटे?

महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के खिलाफ किसी भी कानूनी अपील या पूर्ण विरोध से उद्धव ठाकरे और शरद पवार की दूरी का मुख्य कारण राजनीतिक संतुलन और बहुसंख्यक आबादी के बीच खुद की छवि को बचाए रखना है। अगर उद्धव ठाकरे (शिवसेना-UBT) और शरद पवार (NCP-SP) सीधे तौर पर इस कानून का विरोध करने सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट जाते हैं, तो सत्ताधारी गठबंधन (महायुति) इसे 'नक्सलियों या राष्ट्रविरोधी तत्वों के समर्थन' के रूप में प्रचारित कर सकता है। इससे दोनों दलों को चुनाव में बहुसंख्यक हिंदू वोट बैंक के छिनने का बड़ा राजनीतिक खतरा हो सकता है। खुद शरद पवार ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि जब यह बिल विधानसभा में लाया गया था, तब विपक्ष ने इसका प्रभावी ढंग से विरोध नहीं किया। बाद में जब यह विधान परिषद में आया, तब एमवीए ने वॉकआउट किया, लेकिन कानून पास हो गया।

महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम: एक नजर

इस कानून के अनुसार महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम मुख्य रूप से 'शहरी माओवाद' और राज्य में हिंसक या गैरकानूनी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले संगठनों पर नकेल कसने के लिए बनाया गया एक सख्त कानून है।इस कानून का मकसद राज्य में शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना है। इस अधिनियम के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हैं। इसका मतलब है कि पुलिस किसी भी शख्स को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है। वहीं किसी गैरकानूनी संगठन का सदस्य होने, उसके लिए धन जुटाने, या गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने पर आरोपी को 2 से 7 साल तक की जेल हो सकती है और उस पर 2 लाख रुपये से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

कुसूरवार की संपत्ति कुर्क कर सकती है महाराष्ट्र सरकार

महाराष्ट्र सरकार को यह अधिकार है कि वह किसी भी ऐसे संगठन या व्यक्ति को गैरकानूनी घोषित कर सकती है, जो सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हो। ऐसे संगठनों के बैंक खाते फ्रीज किए जा सकते हैं और उनकी संपत्ति जब्त की जा सकती है।

महाराष्ट्र के इस कानून में क्या है गैर कानूनी, कौन होगा आरोपी

इस कानून के तहत भाषण, लेखन, संकेत या ऐसे किसी भी कार्य को 'गैरकानूनी' माना जा सकता है जो डर पैदा करते हैं, सरकारी कामकाज में रुकावट डालते हैं, या राज्य संस्थाओं के प्रति अवज्ञा को बढ़ावा देते हैं या नागरिक अधिकार समूहों और विपक्षी दलों की ओर से इस कानून की कड़ी आलोचना की जाती है। आलोचकों का मानना है कि 'गैरकानूनी गतिविधि' की परिभाषा बहुत व्यापक है। इसके दुरुपयोग की आशंका जताई जाती है, क्योंकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन, असहमति और सरकार की आलोचना करने वाले सामान्य नागरिकों या कार्यकर्ताओं को भी इस दायरे में लाकर फंसाया जा सकता है।

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