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थोड़ी देर में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलेंगे अभिषेक बनर्जी, TMC में बगावत के बाद पार्टी फंड को लेकर एक और विवाद

TMC Party Crisis: पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान तेज है। TMC में बगावत के बाद अभिषेक बनर्जी दिल्ली में लोकसभा स्पीकर से मुलाकात बहुत जल्द करने वाले हैं। इस बीच TMC ने बागी सांसदों पर फंड और वफादारी को लेकर बड़ा हमला बोला है।
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भारत

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Saurabh Mall

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Updated: 19 Jun 2026, 4:43 PM IST

TMC Party Crisis

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (इमेज सोर्स: आईएएनएस)

TMC Party Fund Controversy: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही टीएमसी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पार्टी में बगावत के बाद अब राजनीतिक लड़ाई के साथ-साथ पार्टी फंड को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है।

इसी बीच TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी दिल्ली पहुंच गए हैं। वह आज लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करने वाले हैं। यह मुलाकात उन 20 बागी सांसदों के मामले में है, जिन्होंने हाल में NCPI ज्वाइन किया है।

TMC नेता कुणाल घोष ने बागी सांसदों पर बोला हमला

टीएमसी नेता कुणाल घोष ने बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो भी लोग 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के टिकट पर इलेक्शन जीते थे, अब वे लोग NDA में शामिल होने की बात कह रहे हैं। उन्हें तो पहले राज्यसभा और लोकसभा से इस्तीफा देना चाहिए। उन्हें टीएमसी के नाम पर वोट मिला था न कि भाजपा के नाम पर। वे ममता बनर्जी के नाम पर चुनाव जीतकर आए थे। आप ममता बनर्जी के उम्मीदवार थे, इसलिए अगर आपको यह सब करना है, तो पहले इस्तीफा दें।

वहीं पार्टी फंड को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता है। उन्हें पार्टी फंड डिपार्टमेंट से कोई लेना देना नहीं है।

TMC में फंड को लेकर मारामारी

चुनावी हार के बाद से तृणमूल कांग्रेस के भीतर कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कलह अब पार्टी के बैंक खाते तक पहुंच गई है। इस बीच पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने एचडीएफसी बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा को पत्र लिखकर TMC के खाते से होने वाले सभी वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाने की मांग की है।

अरूप बिस्वास का कहना है कि पार्टी में बड़े पैमाने पर टूट हो चुकी है। कई सांसद और विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं या खुलकर बगावत कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी की संपत्तियों, बैंक खातों और फंड पर अधिकार को लेकर विवाद पैदा हो गया है। उन्होंने आशंका जताई कि विद्रोही नेताओं के पास मौजूद चेक या वित्तीय अधिकारों का गलत इस्तेमाल हो सकता है। इसलिए स्थिति स्पष्ट होने तक खाते से पैसे निकालने या खाते के संचालन में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।

वहीं, TMC सूत्रों का दावा है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद 5 जून को ही अरूप बिस्वास को कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह सुभाषिश चक्रवर्ती को जिम्मेदारी दी गई थी। ऐसे में बैंक को भेजे गए पत्र की वैधता पर भी सवाल उठ रहे हैं।