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लेबनान में इजरायल की कार्रवाई पर क्यों चुप है पीएम मोदी? कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने किया सवाल

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री मोदी पर लेबनान संकट को लेकर चुप रहने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल करते हुए पूछा कि क्या तथाकथित फादरलैंड उनके लिए मदरलैंड से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

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भारत

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Himadri Joshi

Jun 02, 2026

Jairam Ramesh

कांग्रेस नेता जयराम रमेश (ANI Photo)

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत की कूटनीतिक स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इजरायल की लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई को लेकर चुप रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताएं अगर सफल होती हैं तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खुल सकता है और वैश्विक तेल कीमतों में गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा लाभ भारत को मिलेगा। रमेश के बयान के बाद विदेश नीति और मिडिव ईस्ट संकट पर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।

कई देश खुलकर इजरायल की आलोचना कर रहे - कांग्रेस

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अब भी जारी है, लेकिन इजरायल की लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई समझौते में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। उनके अनुसार लेबनान में अभूतपूर्व सैन्य घुसपैठ ने हालात को और गंभीर कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि कई देश खुलकर इजरायल की आलोचना कर रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। कांग्रेस नेता ने राजनीतिक हमला करते हुए पूछा कि क्या तथाकथित फादरलैंड उनके लिए मदरलैंड से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई तीखी बातचीत

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर तीखी बातचीत हुई। बताया गया कि ईरान ने लेबनान में जारी हमलों के कारण वाशिंगटन के साथ कूटनीतिक वार्ता रोकने की चेतावनी दी थी। इसके बाद ट्रंप ने नेतन्याहू से नाराजगी जताई। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि ट्रंप ने इजरायल की सैन्य प्रतिक्रिया को अत्यधिक बताया और बेरुत पर बढते हमलों को लेकर चिंता व्यक्त की। एक अधिकारी ने दावा किया कि ट्रंप ने कहा कि इन कार्रवाइयों के कारण दुनिया में इजरायल के प्रति नाराजगी बढ रही है।

ट्रंप ने पोस्ट शेयर कर दी जानकारी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य हो सकती है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए पश्चिम एशिया में स्थिरता भारत के आर्थिक हितों से जुडी हुई है। ट्रंप ने बाद में सोशल मीडिया पर कहा कि नेतन्याहू ने उनकी अपील के बाद बेरुत में बड़े सैन्य अभियान को रोका। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत तेज गति से जारी है। इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के साथ भारत की विदेश नीति पर भी नई बहस छेड दी है।