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इनकी अधूरी कहानी: डीके शिवकुमार जैसे कांग्रेस के वो दिग्गज जो मुख्मंत्री बनते-बनते रह गए

Congress Politics : कांग्रेस के अनुभवी नेता सिद्धारमैया दूसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। सीएम पद के लिए कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी। लेकिन वह आलाकमान को अपने पक्ष में नहीं ला पाए। जिस कारण उनकी ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी। बता दें कि, कांग्रेस में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। साल 2018 के बाद कई ऐसे मौके आए हैं, जब किसी नेता की प्रबल दावेदारी होने के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया हो। ऐसे में आइये जानते हैं कांग्रेस के उन नेताओं के नाम, जो CM बनते-बनते रह गए

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Congress Politics : कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की जीत की अटकलें लगाई जा रही थी और इस बात की भी खूब चर्चा थी कि डीके शिवकुमार है मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन जब परिणाम आया, उसके बाद सियासी घटनाक्रम ने जबरदस्त मोड़ लिया, लगभग 30 घंटों तक बैठकों का दौर जारी रहा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे से लेकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, रणदीप सिंह सुरजेवाला जैसे नेताओं ने कई बार सीएम कौन होगा इसके लिए मंथन किया। लेकिन बाद में जब नतीजा निकला तो फैसला यह हुआ कि सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, और डिप्टी सीएम के पद पर डीके शिवकुमार बैठेंगे। यह कहानी नई नहीं है। साल 2018 के बाद देखा जाए तो यह लगातार देखने को मिल रहा है, बस राज्यों में किरदार बदलते गए, लेकिन स्क्रिप्ट हुबहू एक जैसा चलता गया।

सचिन पायलट

साल 2018 में सचिन पायलट राजस्थान के मुख्यमंत्री की दौड़ में थे। लगभग सब कुछ तय हो चुका था, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट की जगह अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बना दिया और सचिन पायलट को डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी दी गई। तब से लेकर अब तक दोनों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।मतभेद बहुत गहरा हो चुका है।

कयास यह भी लगाए जाने लगे हैं कि पायलट कांग्रेस छोड़ भी सकते हैं। नवंबर 2022 में अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को देशद्रोही तक कह दिया था। उन्होंने कहा था कि उनके जैसा कोई व्यक्ति राजस्थान का मुख्यमंत्री नहीं बन सकता, क्योंकि 2020 में सचिन पायलट ने कांग्रेस के खिलाफ विद्रोह कर दिया था और सरकार गिराने की कोशिश की थी।


टी एस सिंहदेव

छत्तीसगढ़ में 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को शानदार जीत मिली। भूपेश बघेल को मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन इस रेस में टी एस सिंहदेव का नाम भी चल रहा था। कुछ समय बाद बघेल और देव के बीच दरार बढ़ गई। 2022 में टी एस सिंह देव ने कहा था वह ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज से संतुष्ट नहीं है।

उन्होंने मंत्रिमंडल के 5 विभागों में से एक पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से इस्तीफा दे दिया था। उस पत्र में देव ने बघेल को लिखा था कि वह जनघोषणा पत्र के अनुसार काम नहीं करते, इसलिए मैं इस पद की जिम्मेदारी नहीं लूंगा।

प्रतिभा सिंह

इसी साल मार्च में हुए चुनाव में कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में बीजेपी को सत्ता से बेदखल किया। इसके बाद संभावित सीएम उम्मीदवारों के कई नाम सामने आए, जिसमें वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह का नाम सबसे आगे चल रहा था। प्रतिभा सिंह ने चुनाव जीतने के बाद यह तर्क दिया था कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव जीतने के लिए उनके दिवंगत पति के नाम का इस्तेमाल किया है।

उन्होंने बार-बार मुख्यमंत्री चुने जाने के लिए आलाकमान को अपना नाम सुझाया। लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने हिमाचल के मुख्यमंत्री के रूप में सुखविंदर सिंह सुक्खू के नाम पर मुहर लगा दी। बाद में प्रतिभा सिंह ने अपने जज्बातों को काबू में रखते हुए कहा कि पार्टी आलाकमान का यह फैसला मुझे स्वीकार है और मुख्यमंत्री नहीं बनने का मुझे कोई दुःख नहीं है।

नवजोत सिंह सिद्धू

साल 2021 की बात है जब पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू के बीच में बिल्कुल नहीं बन रही थी। हर बात को लेकर दोनों के बीच तनातनी की नौबत हो जा रही थी। बात इतनी बिगड़ गई कि कैप्टन ने इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया।

इसके बाद शुरू हुई पंजाब के नए कप्तान खोजने की कवायद।जिसमें सिद्धू समेत कई बड़े नामों पर अटकलें लगने लगी। सिद्धू का भी मन में हो रहा था कि मैं मुख्यमंत्री बन जाऊंगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं और पार्टी ने दलित चेहरे चरणजीत सिंह चन्नी पर दांव लगा दिया। लेकिन उनका दांव अगले चुनाव में बिल्कुल असफल रहा और आम आदमी पार्टी की प्रचंड बहुमत से सरकार बनी।


हिमंत बिस्व सरमा और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने छोड़ी पार्टी

एक समय कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया और हिमंत बिस्व सरमा ने भी सीएम पद न मिलने से असन्तुष्ट होकर कांग्रेस छोड़ भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली थी। 2018 चुनाव में कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मिलकर कांग्रेस के लिए जोरदार प्रचार किया था। सिंधिया को उम्मीद थी कि कांग्रेस उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए चुनेगी। लेकिन कमलनाथ को चुना गया।

बाद में सिंधिया ने कांग्रेस के 22 विधायकों के साथ इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में चले गए। इसके बाद कमलनाथ सरकार गिर गई। इसी तरह असम में भी हुआ, जब 2011 में हिमंत विस्व सरमा ने खूब मेहनत करके कांग्रेस को सत्ता दिलाई थी। लेकिन उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने सत्ता अपने बेटे को चाहा। इस कारण से असम कांग्रेस में दरार आ गई।

फिर 2014 में सरमा ने गोगोई मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल हो गए। 2016 के विधानसभा चुनाव के लिए उन्होंने बीजेपी के लिए खूब प्रचार किया और बीजेपी सत्ता में आई, तो सर्वानंद सोनेवाल को सीएम बनाया गया। इसी बीच सरमा जमीन पर काम करते गए और उनकी लोकप्रियता का ग्राफ दिन प्रतिदिन बढ़ता गया। पार्टी ने उनकी मेहनत का फल उन्हें 2021 में असम का सीएम बना कर दिया।