
Who Will Be Delhi CM? दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचंड बहुमत से जीतने के बाद भाजपा किसे मुख्यमंत्री बनाएगी, इसको लेकर मंथन का दौर चल रहा है। यों तो यह फैसला संसदीय बोर्ड की बैठक में होगा, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा ऐसे चेहरे की तलाश में है जिससे कास्ट-क्लास के साथ दूसरे राज्यों में 'आगे की राजनीति' के फैक्टर को भी साधा जा सके। भाजपा को तलाश ऐसे चेहरे की है, जिसके जरिए दिल्ली ही नहीं देश भर में संदेश जाए। नए सीएम के जरिये चुनावी राज्य बिहार और पंजाब तक समीकरण सध जाएं तो सोने पर सुहागा। सूत्रों के अनुसार चौंकाने वाले फैसले लेने के लिए चर्चित भाजपा आलाकमान लो-प्रोफाइल और पॉवर सेंटर से दूर रहने वाले चेहरे को वरीयता दे सकता है। क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने के लिए दो उपमुख्यमंत्री भी पार्टी बना सकती है।
महिला: देश में महिला वर्ग बड़ा वोटबैंक बन चुका है। एनडीए शासित 20 राज्यों में कोई महिला मुख्यमंत्री नहीं है, ऐसे में भाजपा किसी महिला को आगे कर देश में बड़ा संदेश दे सकती है। दिल्ली में सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित और आतिशी के रूप में सेट हो चुके ट्रेंड को आगे बढ़ा सकते हैं।
व्यापारी वर्ग: वैश्य और व्यापारी वर्ग भाजपा का अटूट कोर वोटर रहा है। दिल्ली में भी इनका वर्चस्व है। चुनावी राज्य बिहार में भी वैश्य आबादी अच्छी खासी है। ऐसे में वैश्य वर्ग के चेहरे को मौका देकर पूरे देश में इस वर्ग में अपनी पकड़ और मजबूत बना सकती है।
पंजाबी-सिख समुदाय: भाजपा का अगला मिशन पंजाब में भगवा लहराने का है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार बनाने का दावा कर चुके हैं। दिल्ली में पंजाबी और सिख समुदाय की आबादी करीब 30 फीसदी है। ऐसे में इस समुदाय के चेहरे को कमान दी जा सकती है।
पूर्वांचल: पीएम मोदी ने विजयी संबोधन में पूर्वांचल के मतदाताओं का विशेष आभार जताया था। इस वर्ग को स्थायी समर्थक बनाने और साल के आखिर में बिहार में व आगे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लाभ लेने के लिए भाजपा पूर्वांचली चेहरे को कुर्सीं सौंपने का दांव चल सकती है।
दलित: दिल्ली में 17 प्रतिशत से अधिक दलित आबादी है। आरक्षित 12 में से सिर्फ 4 सीटें ही जीतने में पार्टी सफल हुई। दूसरी तरफ, जिस तरह से विपक्ष संविधान और आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा को देश भर में घेरने की कोशिश करता है, उससे भाजपा किसी दलित चेहरे पर दांव खेल सकती है।
नई दिल्ली. दिल्ली में मुख्यमंत्री चयन और शपथ ग्रहण में समय लग सकता है। सूत्रों के मुताबिक नए सीएम के नाम का ऐलान और शपथ ग्रहण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 14 फरवरी को अमरीका दौरे से लौटने के बाद ही होने की संभावना है। मोदी सोमवार को फ्रांस व अमरीका की यात्रा पर रवाना होंगे। संसदीय बोर्ड में नाम तय होने के बाद पार्टी विधायक दल की बैठक में सीएम का औपचारिक चुनाव किया जाएगा।
सरकार के गठन और स्वरूप को लेकर रविवार को बैठकों का दौर चला। गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर दोपहर में करीब दो घंटे लंबी बैठक में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और दिल्ली के पार्टी प्रभारी बैजयंत पांडा शामिल हुए। शाम को विधायक दल की बैठक के बाद नवनिर्वाचित विधायक प्रवेश वर्मा और मनजिंदरसिंह सिरसा ने नड्डा से उनके निवास पर मुलाकात की।
बैठक में प्राथमिकताओं पर चर्चा
शाम को प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र सचदेव ने पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों व सांसदों के साथ प्रदेश मुख्यालय में बैठक की जिसे प्रभारी पांडा और संगठन महामंत्री बी.एल.संतोष ने संबोधित किया। बैठक में प्राथमिकताओं और रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक के बाद नवनिर्वाचित विधायक मनजिंदरसिंह सिरसा और हरीश खुराना ने कहा कि आलाकमान जल्द ही भाजपा कार्यकर्ता को सीएम तय करेगा। बैठक में यमुना की सफाई, पेयजल और सीवरेज के बारे में चर्चा हुई। प्रदेशाध्यक्ष सचदेव ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना से विधायकों और सांसदों के साथ मिलने का समय भी मांगा है।
चुनाव में आम आदमी पार्टी की हार के बाद मुख्यमंत्री आतिशी ने रविवार को राजभवन जाकर उपराज्यपाल वीके सक्सेना को इस्तीफा दिया। जिसके बाद उपराज्यपाल ने विधानसभा भंग कर दिया। इसी के साथ भाजपा की नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया।
Updated on:
10 Feb 2025 08:25 am
Published on:
10 Feb 2025 08:20 am

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