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अध्यादेश के खिलाफ समर्थन मांगने तमिलनाडु पहुंचे अरविंद केजरीवाल, CM एमके स्टालिन से मिले

Arvind kejriwal meets MK Stalin : कई राज्यों का भ्रमण करने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तमिलनाडु पहुंचे हैं। तमिलनाडु पहुंचकर केजरीवाल ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से मुलाकात की है। केजरीवाल केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ स्टालिन का समर्थन चाहते हैं।

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Arvind Kejriwal meets MK Stalin : केंद्र के अध्यादेश के खिलाफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समूचे विपक्ष को एकजुट करने में लगे हैं। इसी बीच केजरीवाल ने आज गुरुवार को तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन से उनके आवास पर चेन्नई में मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ हर मीटिंग की तरह पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, राघव चड्ढा और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी भी मौजूद रहीं। आप के राष्ट्रीय संजोयक अरविंद केजरीवाल अध्यादेश को लगातार संविधान के खिलाफ बता रहे हैं। उन्होंने कल बुधवार को ट्वीट करके बताया था कि केंद्र के असंवैधानिक-अलोकतांत्रिक दिल्ली विरोधी अध्यादेश के खिलाफ डीएमके का सहयोग जुटाने के वास्ते एम के स्टालिन से मिलेंगे।इसी ट्विट में उन्होंने कहा कि वो शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी रांची में मुलाकात करेंगे और समर्थन मांगेंगे।

इन नेताओं ने केजरीवाल को समर्थन दिया

अरविंद केजरीवाल को अध्यादेश को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव का साथ मिला है। केजरीवाल से इन दोनों नेताओं से मुलाकात की थी। नीतीश ने अध्यादेश के खिलाफ विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की है। केजरीवाल के लिए यह बड़ी राहत की बात है।

ममता ने भी इन्हें समर्थन देने का वादा किया है। बुधवार 24 मई को मुंबई में उद्धव ठाकरे ने भी इन्हें साथ देने की बात कही। इसके बाद 25 मई गुरुवार को शरद पवार से मुलाकात का अंजाम में केजरीवाल के पक्ष में रहा। अब आगे केजरीवाल झारखण्ड के सीएम हेमंत सोरेन से मिलने वाले हैं वहां से भी इन्हें समर्थन ही मिलेगा ऐसी उम्मीद जताई जा रही है।

BJP लोकतंत्र और SC में विश्वास नहीं करती

CM अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि दिल्ली में सेवाओं पर नियंत्रण से जुड़ा केंद्र का अध्यादेश इस बात का परिचायक है कि मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट पर विश्वास नहीं करती है। एक लोकतंत्र में सत्ता चुनी हुई सरकार के हाथों में होनी चाहिए, क्योंकि वह लोगों के प्रति जवाबदेह होती है। बीजेपी न तो लोकतंत्र और न ही सुप्रीम कोर्ट में विश्वास करती है।

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क्यों दौड़ भाग कर रहे हैं केजरीवाल

केजरीवाल को पता है कि लोकसभा में बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए आसानी से इसे पास करा लेगी, क्यूंकि यहां इनके पास पर्याप्त बहुमत है। लेकिन राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमत नहीं है। यहां एनडीए के पास 110 समर्थन है, ऐसे में बीजेपी को इस अध्यादेश को पास कराने के लिए एनडीए के अलावा अन्य सदस्यों की जरूरत भी पड़ेगी।

इसीलिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पूरी कोशिश कर रहे हैं कि केंद्र सरकार इस अध्यादेश को राज्यसभा में पास नहीं करा पाए। इसके लिए विपक्षी पार्टियों को एकजुट कर रहे हैं। इस कड़ी में वो विपक्ष के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं और इस अध्यादेश के खिलाफ उनकी पार्टी को सपोर्ट देने की बात कर रहे हैं।

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