उपहार सिनेमा कांड से जुड़े सबूतों से छेड़छाड़ मामले में सुशील अंसल और गोपाल अंसल समेत अन्य दोषियों को सात साल कैद की सजा सुनाई गई थी। अंसल बंधुओं ने इस सजा को रद्द कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
उपहार सिनेमा कांड में दोषी सुशील अंसल और गोपाल अंसल समेत अन्य आरोपियों को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में अंसल भाइयों को किसी भी तरह की राहत देने से मना कर दिया है। उल्लेखनीय है कि अंसल बंधुओं ने और अन्य ने उपहार सिनेमा में लगी आग से जुड़े सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में मिली सात साल की सजा को निलंबित करने की मांग से जुड़ी याचिका दायर की थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ बुधवार ये फैसला सुनाया। बता दें कि कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें खत्म होने के बाद 27 जनवरी 2022 को आदेश सुरक्षित रख लिया था।
पीठ ने कहा था, "हम प्रयास करेंगे कि ट्रायल कोर्ट के समक्ष सुनवाई से पहले याचिका पर फैसला सुना सकें। यदि, फैसला तब तक नहीं आता है तो हमें ट्रायल कोर्ट को अपीलों पर सुनवाई जारी रखने का निर्देश देना होगा।"
कब हुआ था सजा का फैसला?
बता दें कि पिछले साल 3 दिसम्बर को पटियाला हाउस कोर्ट के सेशन्स कोर्ट ने उपहार सिनेमा कांड मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में दोषी अंसल भाइयों और दिनेश चंद्र श्रहम की अपील को खारिज कर दिया था। इससे पहले 8 नवंबर 2021 को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले के पाँच आरोपियों को 7-7 साल की सजा के अलावा अंसल बंधुओं पर 2.25 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
दरअसल, पिछले साल 8 अक्टूबर को कोर्ट ने अंसल बंधुओं समेत अन्य को दोषी करार दिया था। दिल्ली हाई कोर्ट में में सुशील अंसल के खिलाफ उपहार त्रासदी पीड़ित एसोसिएशन (एवीयूटी) की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने याचिका दायर की थी।
क्या है मामला?
बता दें 13 जून 1997 को दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित उपहार सिनेसम में बॉर्डर फिल्म दिखाई जा रही थी। इसी दौरान आग लगने और दम घुटने से 59 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना से मची भगदड़ में 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
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