
जानिए कौन हैं जस्टिस मुक्ता गुप्ता जिन्होंने रिटायरमेंट के दिन सुनाए 65 फैसले
Justice Mukta Gupta Profile: रिटायरमेंट यानी कि सालों से करते आ रहे नौकरी का आखिरी दिन... आम तौर पर इस दिन लोग अपने काम से दूरी बनाकर साथियों के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करते हैं। अपनी नौकरी से जुड़े अनुभवों को याद करते हैं। लेकिन कई लोग ऐसे भी होते हैं जो रिटायरमेंट वाले दिन कुछ ऐसा कर जाते हैं जो अपने आप में एक बड़ी मिसाल बन जाती है। ऐसी ही एक महिला की कहानी सामने आई है। यह महिला दिल्ली हाईकोर्ट में जज थी, अपने रिटायरमेंट के दिन उन्होंने 65 फैसले सुना दिए। लास्ट वर्किंग डे पर 65 फैसले सुनाने वाली महिला जज का नाम जस्टिस मुक्ता गुप्ता (Justice Mukta Gupta) हैं। उनके इस काम की लोग तारीफ कर रहे हैं। आइए जानते हैं जस्टिस मुक्ता गुप्ता की पूरी कहानी-
14 साल के करियर का सुखद अंत
जस्टिस मुक्ता गुप्ता दिल्ली हाई कोर्ट में 14 साल जज थी। मंगलवार को वो रिटायर हो गई हैं। 26 जून यानि की सोमवार को उनका आखिरी वर्किंग-डे था। जिस दिन उन्होंने 65 फैसले सुना कर अपने करियर का सुखद अंत किया। हालांकि अपने रिटायरमेंट के दौरान वो भावुक नजर आई। साथी जजों के साथ उनकी कुछ तस्वीरें सामने आई है, जिसमें उनकी भावनाओं आंसुओं के शक्ल में निकलती नजर आ रही है।
वो बड़े मामले जिसमें जस्टिस मुक्ता गुप्ता सुनाया फैसला
- साल 2014 के गैंग रेप केस में 5 दोषियों को ट्रायल कोर्ट से मिली ताउम्र कैद की सजा को सामान्य उम्रकैद में बदला।
- 12 साल के बच्चे के अपहरण और हत्या मामले में फांसी की सजा को 20 साल की उम्र कैद में बदला।
- कस्टोरियल डेथ के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के 5 जवानों राहत नहीं दी। साल 2006 के इस मामले में पुलिसकर्मियों की 10 साल की सजा है।
अब जानिए जस्टिस मुक्ता गुप्ता का प्रोफाइल
जस्टिस मुक्ता गुप्ता मूलरूप से दिल्ली की रहने वाली है। उनका जन्म 28 जून, 1961 को दिल्ली में हुआ था। 1980 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से बीएससी जूलॉजी में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 1983 में कैंपस लॉ सेंटर से LLB की डिग्री पूरी की थी। साल 1984 में उन्होंने दिल्ली बार कौंसिल में एडवोकेट के तौर पर रजिस्ट्रेशन के बाद प्रैक्टिस शुरू की थी।
2009 में वकील से जज में हुईं थी प्रमोट
1993 में मुक्ता गुप्ता को दिल्ली हाई कोर्ट में अतिरिक्त सरकारी वकील नियुक्त किया गया। इसके बाद वे अगस्त, 2001 में दिल्ली हाई कोर्ट में दिल्ली सरकार की स्टैंडिंग काउंसिल (क्रिमिनल) नियुक्त हुईं। अक्टूबर, 2009 में मुक्ता गुप्ता वकील से जज के तौर पर प्रमोट की गई थीं। उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट में एडिशनल जज नियुक्त किया गया था। 29 मई, 2014 को वे परमानेंट जज बन गई थीं। फिर 14 साल जज की नौकरी करने के बाद अब वो रिटायर हुईं।
कई हाई प्रोफाइल मामलों में रहीं वकील
जज बनने से पहले जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई हाई प्रोफाइल मामलों में पैरवी की थी। जिसमें जेसिका लाल मर्डर केस, संसद हमला, लाल किला हमला, नैना साहनी मर्डर केस, नीतीश कटारा मर्डर केस, प्रियदर्शिनी मट्टू मर्डर केस आदि शामिल हैं। इन सब केसों में उनकी दलीलें सुनकर कोर्ट ने उनकी काबलियित को सराहा।
जीबी रोड की सैकड़ों लड़कियों को दी नई जिंदगी
दिल्ली का जीबी रोड वेश्यावृति के लिए मशहूर है। यहां की तंग कोठरियों में कई लड़कियों की जिंदगी हर रोज बर्बाद होती हैं। दिल्ली हाईकोर्ट का जज बनने के बाद जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने जीबी रोड की 300 नाबालिग लड़कियों को नया जीवन दिया था।
दरअसल हाईकोर्ट में जीबी रोड से जुड़ा एक मामला काफी सालों से पेटिंग पड़ा था। जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने योजना बनाकर जीबी रोड की 300 लड़कियों को मुक्त कराया था। फिर इन सभी की काउंसिलिंग के बाद उनकी रोजी-रोटी की व्यवस्था की थी।
अब आगे क्या करेंगी जस्टिस मुक्ता गुप्ता
कानून-कचहरी में इतना लंबा समय बिताने के बाद जस्टिस मुक्ता रिटायर तो हो गई हैं, लेकिन काले कोट से उनका नाता अभी टूटेगा नहीं। उनके करीबियों ने बताया कि जज की जिम्मेदारी से रिटायरमेंट के बाद अब वे एक बार फिर वकील के तौर पर दिखाई देंगी। हालांकि इस बार वे हाई कोर्ट के बजाय सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों को लड़ेंगी। जस्टिस मुक्ता गुप्ता का करियर उनका काम के प्रति समर्पण का भाव कईयों को प्रेरित करने वाला है।
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Published on:
27 Jun 2023 04:51 pm

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