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Delhi Floods: बाढ़ से जूझ रही दिल्ली में मंडरा रहा है अब ये खतरा, विशेषज्ञों ने किया अलर्ट

Delhi Floods: राजधानी दिल्ली यमुना के विक्राल रूप के कारण डूब चुकी है। बाढ़ से ना सिर्फ लोगों की जान डूबने से जाती है बल्कि इस दौरान कई बीमारियों का भी खतरा बढ़ जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाढ़ के समय और पानी का स्तर नीचे जाने पर भी स्वास्थ्य संबंधी बड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

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Jul 15, 2023
Delhi Floods

Delhi Floods: उत्तर भारत में अधिकांश राज्यों में जमकर बारिश हो रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बाढ़ का कहर जारी है। यमुना नदी में जल स्तर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर- 208 मीटर से अधिक पर पहुंच गया था। हालांकि अब धीरे धीरे कम हो रहा है। खतरे के निशान से लगभग 3 मीटर ऊपर बह रही यमुना का पानी बाढ़ का रूप लेकर दिल्ली को डराने लगा। कहीं रेगुलर टूटे तो कहीं पानी का भारी भराव हो गया। राजधानी में कई इलाके अभी भी जलमग्न है। कश्मीरी गेट, आईटीओ और राजघाट अभी भी जल-जमाव से जूझ रहे हैं। ऐसे हालात पर ध्यान नहीं दिया गया तो सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकट पैदा हो सकता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का स्वास्थ्य संबंधी बड़ी समस्याओं को लेकर अलर्ट जारी किया है।

डेंगू (Dengue)

बाढ़ के दौरान और उसके बाद मच्छरों की आबादी बढ़ने से डेंगू का खतरा बढ़ सकता है। बारिश के बाद जमा पानी में मच्छर ब्रीडिंग करते हैं। इसके बाद डेंगू का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है। डेंगू एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलता है। यदि किसी इंसान को डेंगू हो जाता है तो इनमें बुखार, शरीर में दर्द, मांसपेशियों में दर्द और सर्दी जैसे लक्षण नजर आते है।


हाइपोथर्मिया (Hypothermia)

लगातार पानी में रहने से हाइपोथर्मिया की भी परेशानी हो सकती है। ज्यादा देर पानी में रहने के कारण इंसान के शरीर का तापमान सामन्य से नीचे आ जाता है। शरीर का तापमान सामान्य यानी 35 डिग्री से नीचे चला जाता है। ऐसे हालात बहुत घातक हो सकती है। कई बार ऐसी स्थिति में इंसान की जान भी जा सकती है।

हेपेटाइटिस ए-(Hepatitis A)

बाढ़ के कारण कई जगह पीने के पानी की समस्या हो जाती है। कई बार मजबूरी में दूषित पानी पीना पड़ता है। ऐसे में कई बीमारियों को न्यौता मिल जाता है। हेपेटाइटिस ए लीवर का रोग है जो वायरस हेपेटाइटिस ए के कारण होता है। यदि इंसान इस वायरस से तब प्रभावित होते हैं जब दूषित पानी या भोजन के संपर्क में आते हैं। हेपेटाइटिस ए के लक्षण की बात करे तो इंसान में बुखार, अस्वस्थता, भूख न लगना, दस्त, मतली, पेट में दर्द, गहरे रंग का मूत्र और पीलिया हो जाता है।

टाइफाइड (Typhoid)

दुषित पानी से टाइफाइड बुखार का खतरा भी बढ जाता है। यदि सैनिटेशन ख़राब हो तो बाढ़ के दौरान टाइफाइड का प्रकोप अधिक होने की संभावना हो सकती है। साल्मोनेला टाइफी वह जीवाणु है जो टाइफाइड बुखार का कारण बनता है। एक बार शरीर के अंदर ये बैक्टीरिया बढ़ जाते हैं और पूरे रक्तप्रवाह में फैल जाते हैं। इसके बाद लगातार बुखार, थकावट, सिरदर्द, मतली, पेट में दर्द और दस्त जैसे लक्षण नजर आते है। यदि समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह टाइफाइड की बीमारी बहुत घातक हो जाती है।

त्वचा से संबंधित इन बीमारियों का खतरा

बाढ़ के दौरान और उसके बाद मच्छरों की आबादी बढ़ने से डेंगू बुखार, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियां तेजी से फैलने का खतरा पैदा हो सकता है। इसके साथ ही दूषित बाढ़ के पानी के सीधे संपर्क से त्वचा संबंधी समस्याएं और संक्रमण हो सकते हैं। प्रदूषित पानी के संपर्क में आने वाले खुले घाव या कटे हुए घाव विशेष रूप से संक्रमण के प्रति संवेदनशील होते हैं। कई घंटों तक गंदे पानी और अस्वच्छ स्थितियों के संपर्क में रहने के कारण त्वचा पर चकत्ते, जलन और फंगल संक्रमण भी हो सकते है।

Published on:
15 Jul 2023 11:54 am
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