योजना आयोग के पूर्व सदस्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर देश के अग्रणी विशेषज्ञों में से एक अर्थशास्त्री अभिजीत सेन का सोमवार रात निधन हो गया। वह 72 वर्ष के थे। इसकी जानकारी उनके भाई ने दी। अपने चार दशकों के अधिक के अकादमिक करियर में कई बड़े नामी संस्थानों में पढ़ाया।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के प्रमुख विशेषज्ञ और योजना आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर अभिजीत सेन का सोमवार रात निधन हो गया। 72 वर्षीय प्रोफेसर सेन एक लंबी बीमारी से ग्रस्त थे। इसकी जानकारी उनके भाई ने दी। अपने चार दशकों के अधिक के अकादमिक करियर में कई बड़े नामी संस्थानों में पढ़ाया। वे 2004 से 2014 तक योजना आयोग के सदस्य थे। जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे।
प्रोफेसर अभिजीत सेन के निधन की जानकारी देते हुए उनके भाई डॉ प्रणब सेन ने कहा कि उन्हें रात करीब 11 बजे दिल का दौरा पड़ा। हम उसे अस्पताल ले गए, लेकिन जब तक हम वहां पहुंचे, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। उन्होंने चार दशकों से अधिक के करियर में कई बड़े नामी संस्थानों में पढ़ाया। इसके अलावा कृषि लागत और मूल्य आयोग के अध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर रहे।
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अभिजीत सेन ने चार दशकों से अधिक के करियर में कई बड़े नामी संस्थानों में पढ़ाया। उन्होंने 1985 में जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रों को आर्थिक अध्ययन पढ़ाते थे। उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बड़ा जानकार माना जाता था उन्होंने आक्सफोर्ड, कैंब्रिज और एसेक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विश्वविद्यालय में भी छात्रों को अर्थशास्त्र पढ़ाया। इसके अलावा वे 2004-2014 तक योजना आयोग के सदस्य थे और कृषि लागत और मूल्य आयोग, 1997-2000 के अध्यक्ष थे।
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