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5 राज्यों में ED की छापेमारी, विदेशी फंड से अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेज रैकेट का पर्दाफाश

Money Laundering Case: ईडी ने विदेशी फंडिंग के जरिए रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की कथित अवैध घुसपैठ और बसाने वाले नेटवर्क का खुलासा करते हुए पांच राज्यों में 13 ठिकानों पर छापेमारी की।
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भारत

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Devika Chatraj

Jul 18, 2026

ED Raid

ईडी की पांच राज्यों में छापेमारी (ANI)

ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक ऐसे बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है, जो विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले कुछ चैरिटेबल ट्रस्टों के जरिए कथित तौर पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराने और उन्हें यहां बसाने का काम कर रहा था।

अलग-अलग राज्यों में की छापेमारी

इसी मामले में ईडी ने दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र समेत पांच राज्यों में कुल 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई जांच के तहत की गई।

ब्रिटेन से FCRA के तहत आता था विदेशी फंड

ईडी के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि ब्रिटेन स्थित कुछ संस्थाओं से एफसीआरए (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) के तहत विदेशी फंड संबंधित ट्रस्टों को भेजा जाता था। इसके बाद इस राशि को अलग-अलग बैंक खातों और कई स्तरों वाले लेन-देन (मल्टी-लेयर्ड ट्रांजैक्शन) के जरिए कथित तौर पर उन लोगों तक पहुंचाया जाता था, जिन्हें भारत में अवैध रूप से बसाया जा रहा था।

कई किश्तों में भेजी जाती थी छोटी-छोटी रकम

जांच में यह भी पता चला कि 6 हजार, 8 हजार और 10 हजार रुपये जैसी छोटी-छोटी रकम कई किश्तों में भेजी जाती थी, ताकि इन लोगों को भारत में रहने और अपनी नई जिंदगी शुरू करने में आर्थिक मदद मिल सके।

मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ विदेशी फंड

ईडी का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे सबूत मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि विदेशी फंड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के माध्यम से कथित अवैध गतिविधियों के लिए किया गया।

एक गिरोह घुसपैठ कराता था, दूसरा तैयार करता था फर्जी दस्तावेज

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों के लिए फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट जैसे भारतीय दस्तावेज तैयार करवाता था। इसके बाद उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजकर नौकरी दिलाने, ई-रिक्शा उपलब्ध कराने या नकद सहायता देकर स्थायी रूप से बसाने की व्यवस्था की जाती थी। ईडी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में सक्रिय एक गिरोह अवैध घुसपैठ कराने का काम करता था, जबकि दूसरा गिरोह फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। इसके बाद इन लोगों को रोजगार और अन्य कामों के लिए देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जाता था।

इन संस्थानों और ठिकानों पर हुई छापेमारी

ईडी की कार्रवाई के दायरे में दिल्ली के मदनपुर खादर स्थित सन शाइन हेल्थ एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी, पश्चिम बंगाल की कबीरबाग मिल्लत अकादमी और उत्तर प्रदेश के हरोड़ा स्थित अल-जामियातुल इस्लामिया दारुल उलूम समेत कुछ अन्य संस्थान और संदिग्ध व्यक्ति शामिल हैं। फिलहाल ईडी मामले की जांच आगे बढ़ा रही है और पूरे नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन तथा अन्य संदिग्ध गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।