गुजरात के साबरकांठा गांव के दो परिवारो में 300 के लिए चल रहा झगड़ा चौथी पीढ़ी तक पहुंच गया है। दोनों परिवारों के बीच चली आ रही ये लड़ाई किसी को भी नहीं पता है कि कब खत्म होगी। आइए जानते हैं विवाद से जुड़ी गजब कहानी।
गुजरात के दो आदिवासी परिवारों के बीच मात्र 300 रुपए के लिए झगड़ा 4 पुश्तों से चला आ रहा है। साबरकांठा जिले के इन दोनों परिवारो के बीच चली आ रही ये लड़ाई कब खत्म होने के आसार दूर-दूर तक नहीं दिखाई दे रहे हैं। दरअसल 4 पुश्तों तक ये लड़ाई पहुंचने की वजह ये है कि ये लोग अपने विवाद के निपटारे के लिए पुलिस या किसी अधिकारी से कानूनी रूप से संपर्क नहीं करते हैं। पुश्तों से चल रहे पुराने नियम की तरह ही ये अपने झगड़ो के निपटारे के लिए पुलिस या किसी बड़े अधिकारी से कानूनी तौर पर संपर्क नहीं करते हैं। ये अपने झगड़ों को पंचो के पास लेकर जाते हैं, जो इनके ही समुदाय के बुजुर्गों का एक ग्रुप है।
कैसे शुरू हुआ ये झगड़ा?
पीढ़ीगत चली आ रही दुश्मनी इतनी पुरानी हो गई है कि पूरे झगड़ के बारे में किसी को भी पता नहीं है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि 1960 के दशक में हरखा राठौड़ की साथी आदिवासी जेठा राठौड़ के साथ लड़ाई हुई। इसके बाद उस समय के पंचो ने फैसला सुनाया कि हरखा को जेठा के परिवार को 300 रुपए जुर्माने के रूप में देना होगा। इसके साथ ही यह भी तय किया निर्धारित समय में यदि जुर्माने का पेमेंट नहीं किया गया तो जुर्मान पर चक्रवृद्धि भी लगेगा। पिछले साल दीवाली के दौरान एक पंच ने खुलासा किया कि हरखा के परिवार पर 25,000 रुपए का जुर्माना दंड के रूप में बकाया है। इसके बाद अब जेठा के दो बेटों ने इन पैसों के लिए इसी महीने जनवरी के पहले हफ्ते में हरखा के पोते विनोद, उनके बेटे कांटी और उनकी पत्नी चंपा पर हमला कर दिया।
आखिरकार अब पुलिस के पास पहुंचा मामला
जेठा के दो बेटों के द्वारा हमला करने के बाद आखिरकार यह मामला पुलिस के पास पहुंच गया है। जिसके बारे में पुलिस अधिकारी ने बताया कि "ऐसा मामला केवल दो परिवारों का ही नहीं है, जिनके बीच इस तरह का विवाद है। इस क्षेत्र की सभी जनजातियां पंच प्रणाली का पालन करती हैं। जो अपने झगड़ो को पंचो के पास लेकर जाते हैं। पंच विवादों में दोनों पक्षों के बीच विवाद सुलझाने की भी कोशिश करते हैं, लेकिन इस मामले में समुदाय के बुजुर्ग भी समझौता नहीं करा पाए हैं। हमें कोई सुराग नहीं मिला है कि शुरुआती क्या था। किसी को याद भी नहीं है, लेकिन ये लड़ाई पीढ़ियों से चली आ रही है।