5 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

catch_icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बच्चे की किलकारी से छलके आंसू, पूर्व नक्सली ने कहा- ‘आज सबकुछ है, जो कभी सपने में भी नहीं सोचा था…’

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में पूर्व नक्सली सम्मी ने बच्ची को जन्म दिया। उसने कहा कि दलम में रहकर तो यह नामुमकिन था। आज जो कुछ भी है, उसका सपना तक नहीं देखा था।

2 min read
Google source verification

पूर्व नक्सली ने बच्चे को दिया जन्म (फोटो- सोशल मीडिया)

कभी अबूझमाड़ की जंगलों में खाक छानने वाली नक्सली सम्मी (Naxalite Women) आज मां बन चुकी है। अपने नवजात बच्चे को गोद में लेते ही उसके आंसू छलक पड़े। सम्मी और उसका पति अर्जुन जोकि पूर्व PLGA कमांडर था और पूर्व नक्सली भूपति ऊर्फ वेणुगोपाल का बॉडीगार्ड था। अब पुर्नवास योजना के तहत आम जिंदगी जी रहे हैं। दोनों ने इसी साल 1 जनवरी को महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस के सामने सरेंडर किया था।

दरअसल, नक्सली के दलम में शादी के बाद युवक की नसंबदी की कर दी जाती है, लेकिन 32 साल के अर्जुन को माओवादी सीनियर लीडर ने बख्श दिया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि जनवरी में दंपती ने समर्पण किया था। फरवरी में सम्मी के गर्भवती होने की जानकारी मिली। पुलिस अधिकारी ने भी कहा कि आमतौर पर कैडर को पिता बनने के लिए रिवर्स नसबंदी करवानी पड़ती है। दलम (माओवादी ग्रुप) में कपल्स के लिए बर्थ-कंट्रोल सर्जरी जरूरी थी। सर्जरी के बाद भी, माओवादी लीडरशिप कपल्स को अलग होने के लिए मजबूर करती थी ताकि वे मूवमेंट पर फोकस कर सकें।

दलम में रहकर नॉर्मल लाइफ जीना नामुमकिन

बच्चे को गोद में लेकर सम्मी ने कहा कि दलम में रहकर नॉर्मल फैमिली लाइफ का सपना देखना नामुमकिन था। पहले हम सिर्फ छिपना जानते थे। हम शादी या बच्चों के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। सम्मी ने कहा कि आज मेरे पास वह सबकुछ है, जिसके बारे में मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। वहीं, गढ़चिरौली के SP नीलोत्पल खुद हॉस्पिटल गए और नए जन्मे बच्चे को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि यह बच्चा इस बात का सबूत है कि शांति की जीत होती है।

महाराष्ट्र सरकार का प्रोजेक्ट संजीवनी

दंपती के आत्म समर्पण करने के बाद महाराष्ट्र की गढ़चिरौली पुलिस ने 'प्रोजेक्ट संजीवनी' के तहत उनका स्वागत किया । प्रोजेक्ट संजीवनी महाराष्ट्र सरकार द्वारा शुरू किया गया एक खास प्रोग्राम है, जो पुराने माओवादियों को नई जिंदगी शुरू करने में मदद करता है। पुलिस ने उन्हें आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक अकाउंट, ई-श्रम कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी दिलाने में मदद की। सरकार ने उन्हें रिहैबिलिटेशन के लिए 16.3 लाख रुपये दिए। उन्होंने कपल को भरोसा और सुरक्षा दी।