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Freebie Culture: चुनाव के समय मुफ्त की योजनाओं से सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा- लोग काम करने को तैयार नहीं

Supreme Court: कोर्ट ने कहा कि मुफ्त चीजें देने से लोगों के मन में काम नहीं करने की प्रवृत्ति बढ़ती है। मुख्यधारा के समाज में बेघर लोगों को शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि वे लोग योगदान देने और काम करने में सक्षम हो सकें।

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Feb 12, 2025
Supreme Court

Freebie Culture: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव के समय पार्टियों की मुफ्त की योजनाओं पर नाराजगी जताई है। एससी ने चुनाव के समय राजनीतिक पार्टियों द्वारा मुफ्त के वादों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लोग काम करने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि उन्हें मुफ्त राशन और पैसे मिल रहे हैं। मुफ्तखोरी से लोगों में काम की कमी हो जाती है और बेघर लोगों को मुख्यधारा के समाज में शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिए। ताकि वे योगदान दे सकें और काम कर सकें।

‘लोग काम करने को तैयार नहीं’

जस्टिस बीआर गवई और एजी मसीह की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा ‘दुर्भाग्य से इन मुफ्त सुविधाओं के कारण लोग काम करने को तैयार नहीं हैं। उन्हें मुफ्त राशन मिल रहा है। उन्हें बिना काम किए ही पैसे मिल रहे है। 

बेघर लोगों को समाज में शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिए

केंद्र की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार शहरी गरीबी उन्मूलन मिशन को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, जो शहरी बेघरों के लिए आश्रय सहित विभिन्न मुद्दों का समाधान करेगा। पीठ ने कहा हम उनके प्रति आपकी चिंता की सराहना करते हैं, लेकिन क्या यह बेहतर नहीं होगा कि उन्हें समाज की मुख्यधारा का हिस्सा बनाया जाए और राष्ट्र के विकास में योगदान करने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने कहा कि मुफ्त चीजें देने से लोगों के मन में काम नहीं करने की प्रवृत्ति बढ़ती है। मुख्यधारा के समाज में बेघर लोगों को शामिल करने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि वे लोग योगदान देने और काम करने में सक्षम हो सकें।

‘हमारा प्रोफ़ॉर्मा हमारी वेबसाइट पर है’

बता दें कि पिछले माह में मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक पार्टियों द्वारा मुफ्त योजनाओं की घोषणाओं पर अंकुश लगाने के लिए स्वीकृत और कानूनी जवाब की आवश्यकता पर जोर दिया था। राजीव कुमार ने कहा था कि हमारा प्रोफ़ॉर्मा हमारी वेबसाइट पर है। अब समय आ गया है कि इसे स्वीकार किया जाए और कानूनी जवाब ढूंढे जाएं, लेकिन इस समय हमारे हाथ बंधे हुए हैं क्योंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

छह सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

पीठ ने अटॉर्नी जनरल से कहा कि वह केंद्र से यह पता करें कि शहरी गरीबी उन्मूलन मिशन को कब तक अंतिम रूप दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई छह सप्ताह बाद तय की है।

Updated on:
12 Feb 2025 05:29 pm
Published on:
12 Feb 2025 05:22 pm
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