
Ganesh Chaturthi 2025: आज बैंड-बाजों के साथ पंडालों, घरों और प्रतिष्ठानों में विराजेंगे गणपति(photo-patrika)
देश के अलग-अलग राज्य में मनाया जाने वाला गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के प्रति भक्ति और उत्साह का प्रतीक है। इस बार यह पर्व 27 अगस्त 2025 (कल) मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में विघ्नहर्ता गणपति की पूजा 32 अलग-अलग रूपों में की जाती है, जिनमें से प्रत्येक रूप उनके विशिष्ट गुणों और शक्तियों का प्रतीक है। खास बात यह है कि भारत ही नहीं, बल्कि इंडोनेशिया जैसे देश की करेंसी पर भी गणपति बप्पा की छवि देखने को मिलती है, जो उनकी वैश्विक महत्ता को दर्शाता है। आइए, इस पावन अवसर पर जानें गणेशजी की महिमा और उनके विविध रूपों की अद्भुत कथा।
गणपति, जिन्हें भगवान गणेश के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में विघ्नहर्ता और बुद्धि-समृद्धि के देवता माने जाते हैं। उनकी पूजा 32 विभिन्न रूपों में की जाती है, जिन्हें 'द्वात्रिंशद् गणपति' कहा जाता है। इन रूपों में बाल गणपति, तरुण गणपति, भक्ति गणपति, वीर गणपति, सिद्धि गणपति, और उच्छिष्ट गणपति जैसे कई रूप शामिल हैं, प्रत्येक का अपना विशिष्ट स्वरूप, गुण और महत्व है। ये 32 रूप गणेश के विविध गुणों और शक्तियों को दर्शाते हैं, जैसे बुद्धि, शक्ति, समृद्धि और भक्ति। भक्त इन रूपों की पूजा विशिष्ट मंत्रों, यंत्रों और विधियों के साथ करते हैं, जो उनकी आध्यात्मिक और सांसारिक इच्छाओं को पूरा करने के लिए विशेष रूप से प्रभावी माने जाते हैं। यह विविधता गणपति की व्यापकता और उनके भक्तों के जीवन में उनकी सर्वव्यापी उपस्थिति को दर्शाती है।
इस बार झालावाड़ और देहरादून जैसे शहरों में इको-फ्रेंडली गणपति की मूर्तियां खास आकर्षण का केंद्र हैं। मिट्टी और गोबर से बनी ये मूर्तियां न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि इनकी कीमत भी बाजार में बिकने वाली पीओपी मूर्तियों से कम है। श्री कृष्ण गोशाला, झालावाड़ में कार्मिकों को जयपुर में प्रशिक्षण देकर ऐसी मूर्तियां तैयार की जा रही हैं, जो जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाती हैं।
भगवान गणेश न केवल भारत में, बल्कि इंडोनेशिया की करेंसी पर भी विराजते हैं? इंडोनेशिया के 20,000 रुपये के नोट पर भगवान गणेश की तस्वीर छपी है, जो उनकी वैश्विक लोकप्रियता का प्रतीक है। यह नोट 1998 में जारी किया गया था और आज भी प्रचलन में है। गणेश जी को इंडोनेशिया में बुद्धि, कला और समृद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है।
देश भर के बाजारों में गणेश चतुर्थी की तैयारियां अपने चरम पर हैं। दिल्ली, मुंबई, पुणे, नागपुर, देहरादून, झालावाड़ और बलरामपुर जैसे शहरों में मूर्तियों की बिक्री शुरू हो चुकी है। मिट्टी की मूर्तियों की मांग इस बार प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों से ज्यादा देखी जा रही है, क्योंकि ये पर्यावरण के लिए अनुकूल हैं और पानी में आसानी से घुल जाती हैं।
पिछले पांच सालों में गणेश उत्सव से जुड़े कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। 2020 से 2025 तक, मूर्तियों, सजावट सामग्री, झूमरों, और पूजा सामग्री के कारोबार में हर साल औसतन 8-12% की वृद्धि दर्ज की गई है। मुंबई, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में बड़े पंडालों और घरेलू पूजा के लिए मूर्तियों की मांग ने इस कारोबार को और बढ़ावा दिया है।
2020: कोविड-19 महामारी के कारण कारोबार में कमी आई थी, लेकिन छोटी मूर्तियों और घरेलू पूजा सामग्री की बिक्री बनी रही।
2021: महामारी के बाद बाजार में रौनक लौटी, मूर्तियों की बिक्री में 10% वृद्धि।
2022: इको-फ्रेंडली मूर्तियों की मांग में 20% की बढ़ोतरी, कुल कारोबार में 15% वृद्धि।
2023: सजावट सामग्री जैसे झूमरों और कंठीहार की मांग में 25% की वृद्धि।
2024: मूर्तियों की कीमतों में 10-15% की वृद्धि, कुल कारोबार में 12% की बढ़ोतरी।
2025: इस साल मूर्तियों और सजावट सामग्री की बिक्री में 15% तक वृद्धि की उम्मीद।
भारत में भारत में गणेश चतुर्थी का त्योहार विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गोवा, गुजरात, और तमिलनाडु में बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में, खासकर मुंबई और पुणे में, यह त्योहार सबसे भव्य रूप में देखा जाता है, जहां विशाल पंडालों में भव्य गणेश मूर्तियों की स्थापना, भक्ति भजनों, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। गुजरात में अहमदाबाद और सूरत, कर्नाटक में बेंगलुरु और हुबली, तथा तमिलनाडु में चेन्नई जैसे शहरों में भी यह पर्व उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। इस दौरान लोग गणपति बप्पा की पूजा करते हैं, मोदक अर्पित करते हैं, और विसर्जन के समय भव्य शोभायात्राएं निकालते हैं।
Updated on:
26 Aug 2025 04:53 pm
Published on:
21 Aug 2025 04:33 pm
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