
Gluten Protein: बाजार में बिकने वाले अधिकतर ग्लूटेन फ्री उत्पादों के नाम आपकी जेब कट रही है और कंपनियां मोटा मुनाफा कमा रही हैं। एम्स अस्पताल, दिल्ली के एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि बाजारों और ई-कॉमर्स वेबसाइट पर मिलने वाले ग्लूटेन मुक्त खाद्य पदार्थों में ग्लूटेन को हटा दिया जाता है, लेकिन इनमें सामान्य खाद्य पदार्थों के मुकाबले पोषक सही मात्रा में नहीं होते हैं।
एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर गोविंद मखारिया के नेतृत्व में यह अध्ययन हुआ है। ग्लूटेन एक तरह का प्रोटीन होता है। यह आमतौर पर गेहूं, सुजी, राई और कई अन्य अनाजों में पाया जाता है। एम्स ने अपने अध्ययन में कई सुपर बाजार और ई-कॉमर्स वेबसाइट पर मिलने वाले 485 ग्लूटेन फ्री फूड प्रोडक्ट्स और उन्हीं के जैसे लेकिन ग्लूटेन की मौजूदगी वाले खाद्य पदार्थों को शामिल किया।
एम्स की स्टडी में पाया गया कि ग्लूटेन फ्री फूड प्रोडक्ट्स में प्रोटीन और डायटरी फाइबर जैसे जरूरी पोषक तत्व कम थे। इसके अलावा इनमें वसा, ट्रांस फैट और सोडियम जैसे तत्वों की मात्रा ग्लूटेन वाले पदार्थों के मुकाबले अधिक थी। अध्ययन में यह भी पता चला कि ग्लूटेन मुक्त खाद्य पदार्थ ग्लूटेन युक्त खाद्य पदार्थों के मुकाबले 232त्न तक महंगे हैं।
सीलिएक रोग से पीडि़त लोगों को गेहूं और अन्य अनाज में पाए जाने वाले ग्लूटेन प्रोटीन से आंतों को नुकसान होता है। पाचन कमजोर हो जाता है। इसके लिए बाजार में ग्लूटेन मक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं। इनमें गेहूं या मैदा से ग्लूटेन को अलग कर आटा, बिस्कुट, मैकरोनी, पास्ता आदि तैयार की जाती हैं।
नवजात से लेकर 40 वर्ष तक की उम्र के लोग आमतौर पर सीलिएक बीमारी के शिकार होते हैं। छोटे बच्चों में इस बीमारी की वजह से विकास लगभग रुक जाता है। इससे आगे चलकर मरीज की स्थिति बिगडऩे लगती है।
- डॉ. गोविंद मखारिया, एम्स में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर
Published on:
20 May 2024 09:46 am

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