
Kalaripayattu
कलारीपयट्टु एक ऐसा प्राचीन खेल है, जिसके बारे में दुनिया शायद ही जानती होगी लेकिन गोवा में खेले जा रहे 37वें राष्ट्रीय खेलों में पदार्पण करने के साथ ही इस खेल ने अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है। कलारीपयट्ट को केरल द्वारा आयोजित 2015 के राष्ट्रीय खेलों में एक डेमो खेल के रूप में शामिल किया गया था। राष्ट्रीय खेलों में पहली बार शामिल किए गए कलारीपयट्टु में 16 राज्यों को 224 एथलीटों ने चुनौती पेश की और अपनी कला से सभी को प्रभावित किया। इन एथलीटों में महिला और पुरुष शामिल थे।
कलारीपयट्ट शारीरिक कौशल, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक गहराई का एक मनोरम मिश्रण है। हाल के वर्षों में, यह प्राचीन कला दोबारा जीवित हो रही है। इस लड़ाकू खेल में खिलाडिय़ों के शक्तिशाली मूवमेंट्स सभी को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। भारतीय कलारीपयट्ट महासंघ के महासचिव पूनथुरा सोमन ने कहा, यह वास्तव में सभी मार्शल आर्ट की जननी है। इस बारे में कोई संदेह नहीं है। यह हम सभी के लिए बहुत बड़ा सम्मान है कि हमें गोवा में राष्ट्रीय खेलों में इस अद्वितीय खेल आयोजन को प्रदर्शित करने का मौका मिला।
[typography_font:14pt]ब्रिटिश शासन में लग गया था प्रतिबंध
यह खेल 11वीं शताब्दी ईस्वी में चोल, चेर और पांड्य के शक्तिशाली राजवंशों के शासन के दौरान फला-फूला। हालांकि, ब्रिटिश शासन के दौरान क्रांति के डर से इस खेल पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। वर्ष 1955 में भारतीय कलारीपयट्टू महासंघ (आइकेएफ) की शुरुआत के साथ, भारत के दक्षिणी भाग में पारंपरिक कला रूपों को बढ़ावा देने की पहल के तहत युद्ध खेल ने धीरे-धीरे अपनी लोकप्रियता हासिल की।
[typography_font:14pt;" >ये हथियार होते हैं खेल में इस्तेमाल
कलारीपयट्टू में हथियारों के प्रशिक्षण की एक श्रृंखला शामिल है। इन हथियारों में सबसे प्रतिष्ठित हैं लंबी लाठी, दोधारी तलवार, लचीली तलवार और खंजर। प्रत्येक हथियार में जटिल तकनीकों और रूपों का अपना सेट होता है। आज, मलेशिया, थाईलैंड, इंडोनेशिया और फ्रांस जैसे कई देशों ने इस लड़ाकू खेल में रुचि दिखाई है।
Updated on:
10 Nov 2023 07:45 am
Published on:
10 Nov 2023 07:44 am

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