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NPS: सरकारी कर्मचारियों की हो सकती है बल्ले-बल्ले! मिल सकती है अंतिम सैलरी की 50% पेंशन

New Pension Scheme: एनपीएस अपनाने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों की हो सकती है बल्ले-बल्ले, मिल सकता है अंतिम सैलरी का आधा पेंशन

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New Pension Scheme: विपक्ष ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) का समर्थन कर रहा है और कई राज्यों में विपक्षी सरकारों ने पुरानी पेंशन स्कीम वापस लाने का वादा भी किया है। मोदी सरकार इसके पक्ष में नहीं दिखाई देती, लेकिन कर्मचारियों को उच्च पेंशन देने के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में बदलाव की तैयारी काफी समय से चल रही है। कई राज्यों ने भी केंद्र से फिक्स पेंशन देने की मांग की है। उम्मीद है कि सरकार 23 जुलाई को पेश होने वाले बजट में इससे जुड़ी बड़ी घोषणा कर सकती है। सरकार एनपीएस का हिस्सा बनने वाले केंद्रीय कर्मचारियों को उनके अंतिम वेतन का 50त्न पेंशन के रूप में देने का आश्वासन दे सकती है। यानी केंद्र सरकार के कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले हो सकती है।

पेंशन गैप पूरा करेगी सरकार

एनपीएस को आकर्षक बनाने के लिए सरकार काफी समय से कदम उठा रही है। सरकार ने वर्ष 2023 में वित्त सचिव टीवी सोमनाथन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। यह समिति ओल्ड पेंशन स्कीम को वापस लाए बिना एनपीएस के तहत पेंशन लाभों में सुधार के तरीकों का पता लगा रही है। इसके लिए सोमनाथन समिति ने वैश्विक स्तर पर रिसर्च के साथ आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से किए गए बदलावों के परिणामों को भी देखा है। समिति ने सुनिश्चित रिटर्न प्रदान करने के प्रभाव का आकलन करने के लिए व्यापक गणना भी की है। इसके तहत बाजार से मिले रिटर्न और अंतिम सैलरी की 50त्न राशि के बीच जो गैप होगा, उसकी भरपाई सरकार अपनी तरफ से करेगी।

क्या है आंध्र का गारंटीड पेंशन सिस्टम

आंध्र प्रदेश गारंटीड पेंशन सिस्टम विधेयक एक कॉन्ट्रिब्यूटरी स्कीम यानी अंशदायी योजना है जो गारंटी देती है कि सरकारी कर्मचारियों को उनके अंतिम सैलरी का 50त्न मासिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा और इसमें महंगाई भत्ता राहत भी शामिल होगा। यह सरकार पर अधिक वित्तीय बोझ बढ़ाए बिना पेंशन का आकर्षक विकल्प है। इसमें एनपीएस से मिले कम रिटर्न को सरकारी फंड से पूरा किया जाता है। अभी एनपीएस से पेंशन कर्मचारी के अंतिम वेतन का लगभग 40त्न मिल रहा है। इसलिए सरकार को केवल शेष राशि यानी 10त्न ही अपने फंड देना होगा।

इसलिए बढ़ी ओपीएस की मांग

- पुरानी पेंशन प्रणाली के तहत कर्मचारी की आखिरी सैलरी का 50त्न हिस्सा हर माह पेंशन के रूप में दिया जाता है, जबकि एनपीएस में पेंशन किए गए अंशदान के आधार पर मिलता है।
- एनपीएस में अंतिम महीने की सैलरी का अधिकतम 35त्न से 40त्न ही पेंशन मिलता है, वह भी निश्चित नहीं हैं। क्योंकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का पेंशन राशि पर असर पड़ता है।
- नई पेंशन योजना में मैच्योरिटी पर 60त्न राशि एकमुश्त मिलती है। वहीं 40त्न राशि से एन्युटी खरीदना होता है जिससे पेंशन मिलती है। पेंशन राशि टैक्सेबल है, जबकि ओपीएस में मासिक पेंशन टैक्सफ्री है।
सरकार की परेशानी

ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) में महंगाई को लिंक किया गया है। इसके चलते हर सरकारी कर्मचारी के पेंशन में महंगाई के आधार पर सालाना 6त्न से 8त्न की बढ़ोतरी हो जाती है। इससे सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ता है। इसी बोझ को कम करने के लिए एनपीएस लाया गया था।