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LPG गैस सिलेंडर को लेकर खुशखबरी! अब 5 किलो वाले सिलेंडरों का कोटा हुआ दोगुना

LPG संकट के बीच सरकार ने राहत देते हुए 5 किलो ‘छोटू सिलेंडर’ की सप्लाई दोगुनी कर दी है। बिना कनेक्शन मिलने वाले इन सिलेंडरों से मजदूरों और छात्रों को फायदा होगा, साथ ही ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए नए नियम भी लागू किए गए हैं।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 07, 2026

LPG

LPG Gas(AI Image-ChatGpt)

LPG Crisis: देश में एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई जगहों पर लोगों को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। इसी बीच सरकार ने एक अहम कदम उठाया है, जो खास तौर पर शहरों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए राहत भरी खबर लेकर आया है। सरकार ने 5 किलो वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर यानी 'छोटू सिलेंडर' की सप्लाई को दोगुना करने का फैसला किया है। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा जो अपने गांव छोड़कर शहरों में रोजी-रोटी के लिए आए हैं और छोटू सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं।

दोगुनी होगी सप्लाई


मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने फैसला किया है कि अब रोजाना जितने 5 किलो के सिलेंडर भेजे जा रहे थे, उनकी संख्या बढ़ा दी जाएगी। 2-3 मार्च 2026 के आसपास जो सप्लाई का लक्ष्य तय था, अब उससे लगभग दोगुने सिलेंडर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे जाएंगे। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब गैस की कमी की खबरें तेजी से सामने आ रही थीं।

बिना कनेक्शन भी मिल जाता है सिलेंडर


इन छोटे सिलेंडरों की खास बात यह है कि इन्हें लेने के लिए स्थायी गैस कनेक्शन जरूरी नहीं होता। प्रवासी मजदूर, छात्र या वे लोग जिनके पास स्थायी पता नहीं होता, वे सिर्फ एक पहचान पत्र दिखाकर यह सिलेंडर ले सकते हैं। यही वजह है कि शहरों में रहने वाले अस्थायी कामगारों के लिए यह बहुत उपयोगी साबित होता है।

ब्लैक मार्केटिंग पर भी लगाम की कोशिश


गैस की कमी की खबरों के साथ ही कई जगहों पर सिलेंडरों की कालाबाजारी भी शुरू हो गई थी। इसे रोकने के लिए सरकार ने कुछ सख्त नियम भी लागू किए हैं। अब एक कनेक्शन पर तय समय से पहले दोबारा सिलेंडर बुक नहीं किया जा सकेगा। इससे न सिर्फ भीड़ कम होगी, बल्कि ब्लैक मार्केटिंग पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

इंडक्शन चूल्हों को लेकर भी राहत

इस बीच बिजली मंत्रालय ने भी एक अहम फैसला लिया है। इंडक्शन चूल्हों के लिए स्टार रेटिंग को अनिवार्य बनाने की समयसीमा बढ़ा दी गई है। पहले यह नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होना था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि ऊर्जा दक्षता ब्यूरो से सलाह के बाद यह फैसला लिया गया है, ताकि बाजार और उपभोक्ताओं को थोड़ा और समय मिल सके।