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जज साहब ऑनलाइन सुन रहे थे मुकदमा, टॉयलेट शीट पर बैठा दिखा फरियादी, हाई कोर्ट ने लगाया एक लाख का जुर्माना

Gujarat High Court: ऑनलाइन सुनवाई के दौरान फरियादी टॉयलेट शीट पर बैठ नजर आया था। गुजरात हाईकोर्ट ने एक महीने बाद अब उस व्यक्ति पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

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Jul 15, 2025
गुजरात हाईकोर्ट ने फरियादी पर लगाया एक लाख रुपये का जुर्माना (Photo- Patrika)

Gujarat High Court: गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को एक व्यक्ति पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जो पिछले महीने वर्चुअल कोर्ट की सुनवाई के दौरान टॉयलेट सीट पर बैठे दिखा था। जस्टिस एएस सूपेहिया और जस्टिस आरटी वचानी की खंडपीठ ने अवमानना मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि कोर्ट रजिस्ट्री की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उक्त व्यक्ति 20 जून को न्यायमूर्ति निर्जर देसाई की अदालत में 74 मिनट तक वर्चुअल सुनवाई में जुड़ा रहा और इस दौरान वह शौचालय में बैठे दिखाई दिया।

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22 जुलाई तक कोर्ट में जमा करना होगा जुर्माना

सूरत निवासी इस व्यक्ति को सोमवार को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में मौजूद था, आदेश दिया गया कि वह 22 जुलाई को अगली सुनवाई से पहले कोर्ट रजिस्ट्री में 1 लाख रुपये का जुर्माना जमा करे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उसके वकील से सवाल किया कि क्या उसे अदालत में उचित व्यवहार के बारे में सलाह दी गई थी। वकील ने बताया कि व्यक्ति को उचित तरीके से पेश आने की सलाह दी गई थी।

वरिष्ठ वकील ने बीयर मग में पीने पर मांगी माफी

इसी दिन हाईकोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता भास्कर तन्ना के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेकर दायर अवमानना याचिका पर भी सुनवाई की। तन्ना ने वर्चुअल सुनवाई के दौरान बीयर मग में पीते हुए दिखाई देने पर बिना शर्त माफी मांगी। तन्ना ने कोर्ट में कहा कि उनका ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था। इस पर कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा, क्या इरादे की कमी से कोई अवमाननापूर्ण कार्य समाप्त हो जाता है?

कोर्ट रजिस्ट्री की रिपोर्ट के अनुसार, तन्ना 26 जून को जस्टिस संदीप भट्ट की अदालत में 26 मिनट तक जुड़े रहे और इस दौरान वह फोन पर बात करते और बीयर मग में पीते हुए नजर आए। तन्ना ने माफी मांगते हुए कहा, मैं खुद का बचाव नहीं कर रहा हूं, बस यह इंगित कर रहा हूं ताकि भविष्य में इस पर ध्यान दिया जा सके। अगर वर्चुअल सुनवाई में प्रवेश का नियंत्रण वकीलों के पास है, तो ऐसी समस्याएं हो सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट में यह नियंत्रण कोर्ट अधिकारियों के पास होता है, जिससे अनावश्यक प्रवेश रुकता है।

ऑनलाइन सुनवाई के लिए दिशानिर्देश बनाने पर कोर्ट सख्त

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आईटी रजिस्टार ने वर्चुअल सुनवाई के दौरान अनुशासनहीनता बरतने वाले याचिकाकर्ताओं से निपटने के लिए कोई स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। जब कोर्ट को बताया गया कि इस संबंध में एक मैकेनिज्म फ्रेम कर स्वीकृति के लिए मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया है, तब कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को तय कर दी।

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Updated on:
15 Jul 2025 11:29 am
Published on:
15 Jul 2025 10:22 am
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