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सड़क, पुल सबकुछ बहा ले गई बाढ़ लेकिन इस 300 साल पुराने मंदिर का कुछ न हुआ, अब राज्यपाल ने मांगी रिपोर्ट

Himachal Flood Panchvaktra Temple: हिमाचल में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान मंडी स्थित पंचवक्त मंदिर की तस्वीरें और वीडियो देखकर लोगों को केदारनाथ त्रासदी की याद आई थी। 2008 में केदारनाथ में प्रकृति ने सबकुछ बर्बाद कर दिया था, सिवाए केदारनाथ मंदिर के। अब हिमाचल के पंचवक्त मंदिर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है।

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सड़क, पुल सबकुछ बहा ले गई बाढ़ लेकिन इस 300 साल पुराने मंदिर का कुछ न हुआ

सड़क, पुल सबकुछ बहा ले गई बाढ़ लेकिन इस 300 साल पुराने मंदिर का कुछ न हुआ

Himachal Flood Panchvaktra Temple: बीते कुछ दिनों से देश के अलग-अलग राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ से भारी तबाही मची है। हिमाचल भी इस तबाही की जद में है। यहां जगह-जगह बादल फट रहे हैं और बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया है। इस बीच प्रशासन की ओर से राहत-बचाव कार्य जारी है। इसी कड़ी में शनिवार को हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने मंडी जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान वो भगवान शिव के 300 साल पुराने पंचवक्त मंदिर भी पहुंचे। यह वही मंदिर है, जिसकी तस्वीरें और वीडियो कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। कारण थी यहां आई बाढ़ अपने साथ सड़क, पुल सबकुछ अपने साथ बहा ले गई थी, लेकिन इस मंदिर का बाल भी बांका नहीं हुआ था।


1684-1727 के बीच हुआ था मंदिर का निर्माण
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार इस मंदिर का निर्माण राजा सिद्ध सेन ने 1684-1727 के बीच कराया था। इस मंदिर में भगवान शिव की पंचमुखी प्रतिमा है जिस कारण इसका नाम पंचवक्त्र पड़ा है। यह मंदिर प्राचीन वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। इस मंदिर का भवन केदारनाथ मंदिर से काफी मिलता-जुलता है।


मंदिर का बगल का पुल बह गया, लेकिन इसपर कोई असर नहीं

इस साल मंडी में 100 साल बाद ऐसी बाढ़ आई है जिसमें मकान से लेकर पुल तक सबकुछ बह गए हैं लेकिन यह शिव मंदिर ज्यों का त्यों खड़ा है। मंदिर के बगल स्थित सुकेती खड्ड पर बने विक्टोरिया ब्रिज भी बह गया पर मंदिर चारों तरफ जल प्रलय से घिरे होने के बाद भी ज्यों का त्यों है। इस मंदिर में भगवान शिव के पांच रूप ईशान, अघोरा, वामदेव, तत्पुरुष और रुद्र को दिखाया गया है। मंदिर का मुख्य द्वार ब्यास नदी की ओर है। अब राज्यपाल की पहल के बाद इस मंदिर के जीर्णोद्धार की चर्चा है।

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