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एक्शन में आई पुलिस, राजधानी एक्सप्रेस में पकड़ी गई ‘पानी वाले गांजे’ की तस्करी

Bengaluru Drugs Bust: डीआरआई ने बेंगलुरु के एक होटल से थाईलैंड से लौटे एक व्यक्ति को 18 किलोग्राम गांजे के साथ गिरफ्तार किया।

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Rajdhani Express

राजधानी एक्सप्रेस में तस्करों का भंडाफोड़ (File Photo)

देश की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों में से एक राजधानी एक्सप्रेस एक बार फिर तस्करों के निशाने पर आ गई है। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की संयुक्त कार्रवाई में भोपाल रेलवे स्टेशन पर हाइड्रोपोनिक गांजे (पानी में उगाया गया गांजा) की बड़ी खेप पकड़ी गई है। इस खेप की कीमत लगभग 24.18 करोड़ रुपये आंकी गई है।

DRI का ऑपरेशन वीड आउट

डीआरआई की विशेष कार्रवाई 'ऑपरेशन वीड आउट' के तहत 19 और 20 अगस्त को बेंगलुरु और भोपाल रेलवे स्टेशनों पर छापेमारी की गई। इस दौरान राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली जा रही ट्रेन में 24 किलोग्राम से अधिक हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया गया, जिसकी कीमत प्रति किलोग्राम लगभग 1 करोड़ रुपये है।

मास्टरमाइंड गिरफ्तार

जांच में पता चला कि यह तस्करी का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हुआ है। डीआरआई ने बेंगलुरु के एक होटल से थाईलैंड से लौटे एक व्यक्ति को 18 किलोग्राम गांजे के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह पूरा नेटवर्क दिल्ली से संचालित हो रहा था। इसके बाद दिल्ली से एक व्यक्ति को 1.02 करोड़ रुपये नकद के साथ गिरफ्तार किया गया, जिसे इस तस्करी का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। अब तक इस मामले में 6 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

क्या है हाइड्रोपोनिक गांजा?

हाइड्रोपोनिक गांजा एक विशेष तकनीक से पानी में उगाया जाता है, जो सामान्य गांजे से अधिक नशीला और महंगा होता है। इसकी तस्करी का यह मामला रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

यात्रियों के लिए चेतावनी

इस घटना ने रेलयात्रियों और रेलवे अधिकारियों को सतर्क कर दिया है। डीआरआई और आरपीएफ अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता लगाने के लिए जांच को और गहरा कर रही हैं। अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे ट्रेन में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें और तुरंत सूचित करें।

पुलिस और आरपीएफ की सतर्कता

भोपाल जंक्शन पर हुई इस कार्रवाई में दो यात्रियों को हिरासत में लिया गया, जो इस खेप को दिल्ली ले जा रहे थे। डीआरआई के एक अधिकारी ने बताया कि तस्करों ने राजधानी एक्सप्रेस जैसी वीआईपी ट्रेन को तस्करी के लिए चुना, क्योंकि इसकी कड़ी सुरक्षा के बावजूद उन्हें लगता था कि जांच से बच सकते हैं।
यह घटना रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आरपीएफ और जीआरपी के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

जांच में जुटी टीम

पुलिस और डीआरआई इस मामले में गहन जांच कर रही है ताकि इस तस्करी के नेटवर्क का पूरी तरह पर्दाफाश हो सके। साथ ही, रेलवे स्टेशनों पर निगरानी बढ़ाने और ट्रेनों में चेकिंग को और सख्त करने की योजना बनाई जा रही है।