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सूर्य कुंड में नहीं लगाई डुबकी तो नहीं मिलेगा राम लला की कृपा, अयोध्या वास का पूरा पुण्य

अयोध्या से 6 किलोमीटर दूर दर्शन नगर स्थित सूर्य कुंड का 40.95 करोड़ रुपए से जीर्णोद्धार किया गया। ये कुंड लेजर शो समेत तमाम आकर्षण पर्यटकों को लुभा रहे हैं।

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अयोध्या के सूर्य कुंड पर राजा राम के राज्याभिषेक के समय सूर्यदेव रुके थे।

अनुराग मिश्रा।अयोध्या: तुम त्रेता में भगवान श्रीराम के जन्म के समय हैं एक माह तक दिवस रहा रात हो ही नहीं पाई है दरअसल ऐसा सूर्यवंशी राम लला को देखने भगवान सूर्यदेव चलो के साथ शाप आयोध्या आ जाने से हुआ है न की तरह पौराणिक उल्लेखों के मुताबिक़ भगवान सूर्य देव यहाँ से 1 महीने तक कहीं गए ही नहीं।

सनातन धर्म की सप्तपुरियों में सर्वप्रथम अयोध्या के त्रेतायुगीन वैभव व आधुनिक विकास का समुचित तालमेल उसी सूर्य कुंड में देखने को मिल रहा है। पौराणिक विवरणों में वर्णित सूर्य कुंड आध्यात्मिक व ऐतिहासिक धरोहर है। इसके बावजूद वर्षों तक यह उपेक्षा झेलता रहा। इस विख्यात कुंड के जीर्णोद्धार के लिए यहां 40.95 करोड़ रुपए की लागत से
विकास कार्यों से तो इस पावन पौराणिक कुंड शकल यहाँ पे तो सूरत पूरी तरह बदल गई । आज यह कुंड लोगों को आरोग्य व पुण्य का प्रसाद देने के साथ ही उनके मनोरंजन का भी प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां विकसित पार्क में लेजर शो समेत तमाम आकर्षण विकसित किए गए हैं जिससे पर्यटक यहां खिंचे चले आ रहे हैं।

कुंड में स्नान से कुष्ठ व चर्म रोग होते हैं दूर, प्राप्त होता है अखंड पुण्य
मान्यता है कि जब भगवान राम के जन्म और राज्याभिषेक के समय सारे देवता अयोध्या आए थे और उनमें सूर्य देवता भी थे। सूर्य देवता नगर के पास रुके थे, जिसको आज सूर्य कुंड के नाम से जाना जाता है और वहां पर सूर्य देवता का एक मंदिर भी है। मान्यता है कि इसी स्थान पर सूर्य का रथ रुका था और उस वक्त अयोध्या में एक महीने के लिए सूर्यास्त नहीं हुआ। कहते हैं कि सूर्य के रथ के यहां धस जाने के कारण यहां कुंड का निर्माण हुआ। एक मान्यता यह भी है कि जब चरक ऋषि ने यहां स्नान किया था तो उनका कुष्ठ रोग दूर हो गया था। ऐसे में, जो भी कुष्ठ व चर्म रोगी यहां स्नान करता है उसकी बीमारियां ठीक हो जाती हैं तथा उसे आरोग्य व अखंड पुण्य की प्राप्ति होती है।

म्यूरल आर्ट पेंटिंग यहां कई स्थानों पर म्यूरल आर्ट के जरिए भी सजाया जा रहा है, जिसमें रामायण के प्रसंगों समेत पौराणिक घटनाओं व पात्रों के मनमोहक चित्रण को देख लोग सुखद आश्चर्य से भर उठते हैं।

कुंड पर साउंड व लेजर शो आयोजन शुरू हुआ है। यहां आधे घंटे के लेजर शो का आयोजन होता है जिसमें सूर्य कुंड की आभा, पौराणिक वैभव व सूर्यकुल की परंपरा के बारे में बताया जाता है।

कल्चरल एरिया
कुंड पर एक विशिष्ट सांस्कृतिक स्थल भी है जो ओपन एयर थिएटर का कार्य करता है। यहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन भी 15 जनवरी से 22 जनवरी के मध्य होगा।

सोलर विंटेज लाइटिंगः सोलर पैनल्स के इंस्टॉलेशन से यहां बिजली उत्पादन की जा रही है। यहां विक्टोरियन विटेज थीम्ड आर्क व एलईडी लैंप युक्त लाइटिंग की गई है।

फाउंटेन डिस्प्ले
यहां कुंड में भव्य फाउंटेन को भी लगाया गया है जो आकर्षक रोशनी सज्जा व साउंड सिंक्रोनाइजेशन के जरिए भव्य आभा प्रदान करता है।