
iit madras researchers developed new technology for detect earthquakes
नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन के चलते पिछले कुछ सालों में भारत में प्राकृतिक आपदाएं बढ़ गई हैं। इसी बीच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक बेहद उपयोगी प्रणाली विकसित कर ली है। बताया गया कि इस प्रणाली से न केवल भूकंप की पूर्व चेतावनी दी जा सकती है, बल्कि इससे विनाशकारी तरंगों के भूमि की सतह से टकराने के बीच लगभग 30 सेकेंड से 2 मिनट का लीड समय भी मिल सकता है।
2 मिनट पहले मिलेगी भूकंप की जानकारी
वैज्ञानिकों का कहना है कि हर साल देश में कई लोग भूकंप में मारे जाते हैं। ऐसे में 30 सेकेंड से 2 मिनट पहले भूकंप की जानकारी मिलने से हम कई जिंदगियों को बचा सकेंगे। बताया गया कि इस समयाविधि में कई ऐसी कार्रवाई की जा सकती हैं, जिसमें परमाणु रिएक्टरों और मेट्रो जैसी परिवहन सेवाओं को बंद करना व लिफ्ट या एलिवेटर्स को रोकने जैसे उपाय शामिल हैं, जो भूकंप की स्थिति में जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है।
बता दें कि यह शोध आइआइटी मद्रास में केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अरुण के. तंगीराला के नेतृत्व में किया गया है। शोधकर्ताओं में आइआइटी मद्रास में पीएचडी शोधकर्ता कंचन अग्रवाल शामिल हैं। बताया गया कि जब भूकंप आता है तो यह भूकंपीय तरंगों की एक श्रृंखला उत्पन्न करता है। तरंगों के पहले सेट को पी-वेव कहा जाता है, जो हानिरहित होता है।
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शोधकर्ताओं का कहना है कि इन तरंगों की शुरुआत का पता लगाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके आगमन के समय का एक सटीक अनुमान एक मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने में मदद कर सकता है, जिससे विनाशकारी भूकंप तरंगों के अगले सेट के आने के बीच के समय का आकलन किया जा सकता है। बताया गया कि यह अध्ययन समय-आवृत्ति स्थानीयकरण सुविधा के साथ भविष्यवाणी ढांचे में एक नया रीयल-टाइम स्वचालित पी-वेव डिटेक्टर और पिकर का प्रस्ताव पेश करता है।
Published on:
12 Nov 2021 08:42 pm

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