
Gujarat Crypto-Currency Scam Case: यूके स्थित क्रिप्टो कंपनी- बिटकनेक्ट के एशिया प्रमुख दिव्येश दर्जी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा एक्शन लेते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 433 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। गुजरात में क्रिप्टो-मुद्रा घोटाले में उनकी कथित संलिप्तता के कारण यह एक्शन लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक इस घोटाले में लोगों को उनके निवेश पर भारी रिटर्न पाने का लालच देकर लाखों रुपये की हेराफेरी की गई है।
ईडी ने सोमवार को बताया कि संपत्ति धन-शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत दिव्येश दर्जी की संपत्ति जब्त की गयी है। केंद्रीय एजेंसी ने आईपीसी, 1860, गुजरात जमाकर्ताओं के हितों का संरक्षण अधिनियम (GPID), पुरस्कार धोखाधड़ी धन की विभिन्न धाराओं के तहत सीआईडी (अपराध) गुजरात द्वारा दायर एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की जिसके बाद दिव्येश दर्जी, सतीश कुंभानी, शैलेश भट्ट और अन्य आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
जांच के दौरान, ईडी को जांच में पता चला कि नवंबर 2016 से जनवरी 2018 तक, बिटकनेक्ट कॉइन के प्रमोटर कुंभानी ने प्रमोटरों का एक बड़ा नेटवर्क बनाया और जनता को भारी रिटर्न की पेशकश करके बिटकनेक्ट कॉइन से संबंधित विभिन्न निवेश योजनाओं में निवेश करने के लिए कहा।
अब तक की गई जांच के अनुसार, कुंभानी और उनके सहयोगियों ने लोगों से झूठ बोल भारी निवेश जुटाया और निवेशकों को धोखा दिया। ईडी ने एक बयान में कहा, "गलत तरीके से की गयी आय का एक हिस्सा जो सतीश कुंभानी और उनके सहयोगियों के पास था उसे शैलेश भट्ट और उनके सहयोगियों द्वारा सतीश कुंभानी के दो सहयोगियों का अपहरण करके वसूला गया था।"
ईडी के मुताबिक इस मामले में जब्त की गई चल संपत्तियां सतीश कुंभानी, शैलेश भट्ट और उनके सहयोगियों द्वारा लोगों को गुमराह करके की अर्जित की आय का एक हिस्सा है। बता दें कि मुख्य आरोपी दिव्येश दर्जी को 2018 में दिल्ली हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था जब वह दुबई से लौट रहे थे।
Updated on:
01 Apr 2024 04:53 pm
Published on:
01 Apr 2024 04:43 pm
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