
स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी का 55 सालों का संघर्ष ( फोटो - पत्रिका ग्राफिक्स)
जहां एक तरफ देशभर में स्वतंत्रता दिवस का समारोह मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा मामाला सामने आया है जो शायद आपको भी हैरान कर देगा। यह मामला देश के एक स्वतंत्रता सेनानी और उनकी विधवा के अधिकार से जुड़ा है। कर्नाटक के तुमकुरु जिले की रहने वाली 89 वर्षीय एनके ललिताम्बिका एक स्वतंत्रता सेनानी की विधवा है और वह पिछले कई दशकों से अपनी पति को आवंटित जमीन के लिए लड़ाई लड़ रही है। यह 4 एकड़ पहाड़ी जमीन 1969 में सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी कोटा के तहत ललितांबिका के पति को आवंटित की थी, लेकिन 55 साल बाद भी आज तक भी उन्हें इसका कब्जा नहीं मिल पाया है और न ही इसके बदले कोई अन्य जमीन मिली है।
ललितांबिका ने सरकार की इस देरी को मानवता का अपमान बताया और व्यंग्य करते हुए कहा कि तुमकुरु के राजस्व अधिकारियों को उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए विशेष सेवा पदक दिया जाना चाहिए। अब अपनी जमीन पाने के लिए ललितांबिका ने उप लोकायुक्त न्यायमूर्ति बी. वीरप्पा से शिकायत की है। अपने पति टी.एस. विरुपाक्षप्पा की मृत्यु के बाद 39 सालों से ललितांबिका इस जमीन के लिए लड़ रही है। यह ज़मीन तुमकुरु तालुक के वड्डरहल्ली गांव में सर्वे नंबर 26, प्लॉट नंबर 7 में आवंटित की गई थी।
उप लोकायुक्त को की गई शिकायत में ललितांबिका ने अपना दुख व्यक्त करते हुए कहा, अपनी ज़मीन का कब्ज़ा पाने और उसकी हदें तय करवाने के लिए पिछले 55 सालों में मैंने जितना पैसा और समय बर्बाद किया है, उतने में तो मैं खुद ही अपनी लिए खेती करने लायक ज़मीन खरीद सकती थी। उन्होंने आगे कहा, स्वामी विवेकानंद के कहे हुए शब्द, 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए' पर भरोसा करके, 1969 में शुरू हुआ मेरा संघर्ष आज भी, जब मैं 89 साल की हो गई हूं, जारी है।
उप लोकायुक्त बी. वीरप्पा को जब ललितांबिका के संघर्षों का पता चला तो उन्होंने अगस्त के पहले हफ्ते में राजस्व मंत्री को पत्र लिख कर इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने पत्र में बताया कि ललितांबिका को दी गई यह जमीन एक पहाड़ी जमीन है और इस पर खेती नहीं की जा सकती है। साथ ही यह भी बताया कि ललितांबिका को न तो यह जमीन न इसके बदले कोई अन्य जमीन दी गई है। उप लोकायुक्त ने पत्र में मंत्री से अनुरोध किया कि ललितांबिका को कोई दूसरी ज़मीन या जगह दी जाए, जो 1969 में उसके पति को दी गई ज़मीन के बराबर हो।
राजस्व मंत्री से इस मामले में दखल देने की अपील करते हुए उप लोकायुक्त ने लिखा, 55 साल से ज़्यादा समय बीत चुका है, लेकिन स्वतंत्रता सेनानी को दी गई ज़मीन सिर्फ कागज़ों में है और वह ज़मीन भी ऐसी है जिसका कोई फ़ायदा नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि, पहाड़ी इलाके में ज़मीन देने का क्या मतलब है। उप लोकायुक्त ने कहा कि. यह एक स्वतंत्रता सेनानी और उनके परिवार के साथ धोखा है, कोई मदद नहीं। यह तब के तहसीलदार और डिप्टी कमिश्नर द्वारा किया गया एक साफ़-साफ़ धोखाधड़ी का मामला है। उन्होंने आगे कहा कि, वर्तमान सरकार को इस मामले में दखल देनी चाहिए और ललितांबिका को किसी दूसरी जगह जमीन देनी चाहिए।
Published on:
15 Aug 2025 03:32 pm
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