
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026: फोटो में पीएम मोदी (सोर्स: आईएएनएस)
India AI Impact Summit 2026: 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में एक अहम सवाल पर तीखी बहस छिड़ी- भारत में भारतीयों के डेटा और परिस्थितियों पर विकसित एआइ टूल्स का उपयोग पहले विदेशों में क्यों हो? कई वैश्विक कंपनियों ने माना कि भारत अब एआइ प्रयोगों की प्रमुख जमीन बन चुका है।
राजेश सुब्रमण्यम, सीईओ, फेडएक्स ने बताया कि उनकी कंपनी रोज 700 विमानों और 2 लाख वाहनों से 1.7 करोड़ डिलीवरी कर 2 पेटाबाइट डेटा जुटाती है। इसी आधार पर ‘फेडएक्स इंपोर्ट टूल’ भारत के डेटा से विकसित हुआ, जो शिपमेंट ट्रैकिंग और कस्टम्स अपडेट को ऑटोमेट करेगा और जल्द वैश्विक स्तर पर लागू होगा।
बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के भारत-अफ्रीका प्रमुख अंकुर वोरा ने कहा कि आधार, यूपीआइ, स्वास्थ्य डेटा और भाषिणी के आधार पर ग्रामीण एआइ मॉडल तैयार हो रहे हैं, जिनका उपयोग वैश्विक स्तर पर होगा।
मेटा के चीफ एआइ अधिकारी एलेक्जेंडर वांग ने बताया कि उनके प्लेटफॉर्म पर आधे यूजर्स भारतीय हैं और नए एआइ मॉडल यूजर्स के 'व्यक्तित्व विस्तार' की तरह काम करेंगे। रॉय जैकॉब्स, सीईओ, फिलिप्स ने कहा भारत की जटिल स्वास्थ्य चुनौतियां वैश्विक समाधान गढ़ने का आधार बन रही हैं।
इन दावों के बीच जीत अदानी, निदेशक, अडानी डिजिटल लैब्स ने स्पष्ट कहा कि भारत में विकसित एआइ का पहला लाभ भारत को मिलना चाहिए। खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और उत्पादन को प्राथमिकता दी जाए। इसे संरक्षणवाद नहीं, रणनीतिक परिपक्वता बताते हुए उन्होंने तकनीकी संप्रभुता पर जोर दिया।
Published on:
20 Feb 2026 04:39 am
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