
AI में भारत का दखल (सोर्स: चैट GPT जनरेटेड इमेज)
AI Summit India 2026: आज एआई मॉडलों का विकास दो रास्तों पर हो रहा है। कंपनियों-देशों का एक समूह वह है जो एआई के विकास के लिए सुरक्षा, जवाबदेही को अहम मान रहा है। दूसरा समूह वह है जो मुनाफे और स्पीड पर जोर दे रहा है, जिसमें मानवता के हित की उपेक्षा हो रही है। भारत में हो रही एआइ समिट, एआई विकास यात्रा के इस मोड़ पर एक जरूरी दखल है। इसमें एआई के लिए आल इन्क्लूसिव और ऑल सेफ मॉडल पर जोर दिया गया है।
भारत में आयोजित हो रही तीसरी वैश्विक एआई समिट ठीक उन्हीं चिंताओं को संबोधित कर रही है जो एआइ की दिग्गज कंपनी ओपन एआई द्वारा अपने मिशन में बदलाव के बाद से पैदा हुई हैं। दुनिया की सबसे चर्चित एआइ कंपनी ओपन एआई (चैटजीपीटी की पैरेंट कंपनी) ने अपने गठन के बाद से अपने मिशन स्टेटमेंट में जो बदलाव किए हैं, उसके अनुसार अब ओपनआइ ने सुरक्षा और लाभ को तवज्जो नहीं देने जैसे शब्द हटा दिए हैं। इसके लिए कंपनी ने अपनी संरचना में भी परिवर्तन करते हुए इसके दो हिस्से किए हैं। इस बदलाव के अनुसार कंपनी ने एक ओपनएआई फाउंडेशन बनाया है, जिसके पास कंपनी के अल्पसंख्यक शेयर हैं और दूसरा हिस्सा ओपनएआइ ग्रुप पीबीसी कहलाता है। यह पीबीसी का आशय पब्लिक बेनिफिट कंपनी। इस हिस्से के पास कंपनी के अधिकांश शेयर हैं। जिसका आशय साफ है कि कंपनी अब सबके या मानवता के फायदे के लिए नहीं बल्कि लाभ उन्मुख कंपनी बन चुकी है। इसी बदलाव के बाद से एलन मस्क और डारियो अमोदेई ने ओपनएआइ से दूरी बनाते हुए क्रमशः एआइ कंपनी ग्रोक और एंथ्रोपिक की स्थापना की। जिनका मुख्य लक्ष्य सुरक्षित एआइ का विकास है।
ओपनएएआई अपने एआई मॉडल को केवल उन तक सीमित करना चाहता है जो भुगतान कर सकें। इसके विपरीत, भारत की समिट का मूल आधार 'लोकतांत्रिक एआइ' है। एआइ समिट में लगा एक बिलबोर्ड स्पष्ट तौर पर कहता है कि 'भारत के लिए, ए-आइ का मतलब है सर्व-समावेशी (ऑल-इन्क्लूसिव)।' भारत में हो रहे एआइ शिखर सम्मेलन की वेबसाइट पर वैश्विक एआइ फासले के बढ़ने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा गया है कि, एआई संसाधन और क्षमताएं चुनिंदा देशों और कंपनियों के बीच केंद्रित हैं।
यूरोपीय संघ में भारत के राजदूत सौरभ कुमार ने ने एक कार्यक्रम में स्पष्ट तौर पर कहा था कि, 'हमारा प्राथमिक ध्यान उन प्रयोगों पर है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लोकतंत्रीकरण से जुड़े हैं। हम कैसे व्यापक जनसमुदाय को इससे लाभ पहुंचा सकते हैं?'
इसी कारण भारत अपने 'इंडिया एआई मिशन' के जरिए ओपन-सोर्स मॉडल्स और सरकारी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर (जीपीयू क्लस्टर्स) पर जोर दे रहा है, ताकि एआइ की शक्ति मुट्ठी भर निजी कंपनियों के बजाय आम जनता, किसानों और छोटे उद्यमियों तक पहुंचे।
ओपनएआई का फोर प्राफिट और असुरक्षित एआइ मॉडल वैश्विक असमानता को बढ़ा सकता है। भारत इस समिट में विकासशील देशों की आवाज बनकर उभरा है।
भारत की ओर से समिट में यह सुनिश्चित करने पर चर्चा हो रही है कि एआई का विकास केवल पश्चिमी डेटा या अंग्रेजी भाषा तक सीमित न रहे। भारत की 'भाषिणी' ( बीएचएएसएचआइएनआइ) जैसी पहल यह दिखाती है कि एआइ का लाभ 'पूरी मानवता' को देने के लिए स्थानीय भाषाओं और विविध संस्कृतियों को जोड़ना अनिवार्य है।
सैम ऑल्टमैन की कंपनी ओपनएआइ अब 'रफ्तार और मुनाफे' पर ध्यान दे रही है, जिससे एआइ के अनियंत्रित होने का खतरा है। जबकि भारत इस समिट में 'रिस्पॉन्सिबल एआइ' के लिए एक वैश्विक नियामक फ्रेमवर्क की वकालत कर रहा है। भारत का रुख 'संवैधानिक एआई' (यानी अटल नियमों पर आधारित एआइ) (जैसा एंथ्रोपिक मॉडल है) और 'कानूनी जवाबदेही' से जोड़ने का है, ताकि कोई भी कंपनी 'मुनाफे' के लिए 'सुरक्षा' से समझौता न कर सके। इसके लिए भारत में आयोजित ग्लोबल एआइ समिट 2026 में 'एआइ एथिक्स' को लेकर जो कानूनी प्रस्ताव रखे गए हैं।
भारत ने सुरक्षित एआई के लिए समिट में प्रिंसिपल ऑफ लायबिलिटी, एल्गोरिथमिक ऑडिट, संवैधानिक एआई, डेटा संप्रभुता और रॉयल्टी मॉडल जैसे सुधार दिए हैं।
Published on:
20 Feb 2026 05:24 am
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