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चीन के सबसे बड़े वार्षिक शो से आई डराने वाली तस्वीरें; ड्रैगन के ‘कुंग-फू’ रोबोट्स ने चलाए नानचाकू और तलवार

ड्रैगन चीन की 'सिलिकॉन सेना': चीन के सबसे बड़े वार्षिक शो (सीसीटीवी गाला) में दर्जनों जी1 ह्युमनॉइड रोबोट्स ने जिस तरह से मार्शल आर्ट्स, नानचाकू और 'ड्रंकन बॉक्सिंग' का प्रदर्शन किया, उसने दुनिया भर के विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है।

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भारत

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Saurabh Mall

Feb 20, 2026

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ड्रैगन चीन की 'सिलिकॉन सेना'. फोटो में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (सोर्स: ANI एक्स)

China G1 Humanoid Robots: आज से पांच साल पहले जिसे हम हॉलीवुड की 'टर्मिनेटर' या 'आई, रोबोट' जैसी फिल्मों का हिस्सा मानते थे, वह अब बीजिंग की सड़कों और टीवी स्क्रीन्स पर मार्च कर रहा है। चीन के सबसे बड़े वार्षिक शो (सीसीटीवी गाला) में दर्जनों जी1 ह्युमनॉइड रोबोट्स ने जिस तरह से मार्शल आर्ट्स, नानचाकू और 'ड्रंकन बॉक्सिंग' का प्रदर्शन किया, उसने दुनिया भर के विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है।

हैरानी की बात यह रही कि उनका यह प्रदर्शन मानव बाल कलाकारों से सिर्फ कुछ मीटर की दूरी पर हुआ। कल्पना कीजिए, इनमें से दस लाख रोबोट, एक सैन्य गठन में, 'दुश्मन' को मार देने के एक ही इरादे के साथ आगे बढ़ रहे हो! इनमें थकान नहीं होगी, डर नहीं होगा, भावनाएं नहीं होंगी।

बन सकती है सस्ती और घातक सेना

मात्र 16,000 डॉलर (लगभग 13 लाख रुपए) की कीमत पर मिलने वाला यह रोबोट किसी भी देश के लिए एक 'सस्ती और घातक सेना' तैयार करने का जरिया बन सकता है।' पिछले साल ये रोबोट केवल रूमाल घुमा रहे थे, लेकिन इस साल ये तलवारबाजी कर रहे हैं। 1.32 मीटर लंबे इन रोबोट्स में 23 जॉइंट्स हैं, जो इन्हें एक औसत इंसान से भी अधिक लचीला बनाते हैं। शो के दौरान रोबोट्स ने 'ड्रंकन बॉक्सिंग' की नकल की, जिसमें वे लड़खड़ाते हैं और पीछे गिरकर फिर से खड़े हो जाते हैं। बीजिंग में हुए इस गाला में यूनिट्री, गैल्बोट, नोएटिक्स और मैजिक लैब ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए।

क्या यही है टॉफ्लर का ‘फ्यूचर शॉक’

दिवंगत अमरीकी लेखक और भविष्यवादी एल्विन टॉफ्लर ने अपनी चर्चित किताब 'फ्यूचर शॉक' में चेतावनी दी थी कि जब तकनीक में बदलाव की गति बहुत तेज हो जाएगी, तो समाज उसे संभाल नहीं पाएगा। टॉफ्लर की 'द थर्ड वेव' में उन्होंने कृषि, औद्योगिक क्रांति के बाद तीसरी लहर 'ज्ञान और सूचना' को बताया था। एआइ से लैस रोबोट उसी 'थर्ड वेव' का विस्तार प्रतीत होता है, जहां मशीनें सिर्फ औजार नहीं रहीं; वे श्रम बाजार में इंसानों की भूमिका को चुनौती दे रही हैं बल्कि सैनिकों की भूमिका में भी आने को तैयार हैं।