Job retaining talent in India is very Poor: जॉब के मामले में ड्रीम डेस्टिनेशन के बतौर ब्रिटेन 10वें स्थान पर है। ब्रिक्स देशों में पहले पायदान पर चीन है। हालांकि इस सूची में चीन भी काफी पीछे है। आइए जानते हैं कि और कौन से देश इस मामले में किस पायदान पर हैं।
यूरोपीय देश स्विट्जरलैंड जॉब करने वालों के लिए सबसे मुफीद है, यानी जॉब के मामले में यह ड्रीम डेस्टिनेशन है। ब्लूमबर्ग के हार्वर्ड की बिजनेस स्कूल इनसीड की ओर से 2023 के लिए जारी वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांके अनुसार स्विट्जरलैंड टॉप पर है जबकि सिंगापुर और अमरीका शीर्ष तीन में हैं। भारत इस सूची में काफी नीचे 103 नंबर पर है। रिपोर्ट में इसके पीछे मुख्य वजह घरेलू और विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करने की क्षमता में कमी आना बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, अगले दशक में जीवन की गुणवत्ता और स्थिरता टैलेंट हब बनने का टार्गेट रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण पूंजी होगी। सूची में ब्रिटेन 10वें स्थान पर है। व्यावसायिक और तकनीकी कौशल में कम अंकों के बावजूद सामान्य ज्ञान कौशल और प्रतिभा विकास में उसका दबदबा है। ब्रिक्स देशों में चीन पहले स्थान पर है। वह सूची में 40वें स्थान पर है।
इसलिए टॉप पर है स्विट्जरलैंड
स्विट्जरलैंड ने प्रतिभा को आकर्षित करने और उन प्रतिभाओं को अपने यहां संभाल कर रखने वाले देशों में शीर्ष पर है। इस मामले में उनका दबदबा पिछले 10 सालों से बरकरार है। नए अध्ययन से यह बात सामने आई है कि स्विट्जरलैंड मानव संसाधन के सबसे ऊंचे पायदान पर बने हैं। स्विट्जरलैंड में सोशल सुरक्षा और प्राकृतिक सौंदर्य लोगों को आकर्षित करता है। यही वजह है कि यहां करियर बनाना और यहां बस जाने को लोग प्राथमिकता देते हैं। कर्मचारियों को वेतन देने के मामले में स्विट्जरलैंड विश्व के शीर्ष देशों में है। यहां एक कर्मचारी को औसतन 5 लाख रुपए प्रतिमाह तक वेतन मिलता है। इसके अलावा यहां उच्च स्तरीय सामाजिक सुरक्षा और प्राकृतिक वातावरण प्रतिभाओं को आकर्षित करने और उन्हें बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाता है।
भारत इस सूची में क्यों है इतना नीचे?
भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश होने के बावजूद इस सूची में काफी पीछे 103वें स्थान पर है। भारत 2020 के बाद से इस सूची में लगातार नीचे की ओर फिसलता जा रहा है। नई सूची में भारत लगातार पिछड़ते हुए ब्रिक्स देशों में सबसे निचले स्थान पर पहुंच गया है। इस गिरावट की वजह घरेलू और विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित करने की क्षमता में कमी आना है।