दुनिया के 11 देशों में टिल्टिंग ट्रेनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। देश को साल 2025-26 तक पहली टिल्टिंग ट्रेन मिल जाएगी। इस तरह के टेक्नोलाजी का उपयोग करके 100 वंदे भारत ट्रेन का निर्माण किया जा रहा है। ये सभी ट्रेन घुमावदार रास्ते पर बाइक की ही तरह तेज गति से मुड़ने में सक्षम होगी।
Tilting Train : देश को साल 2025-26 तक पहली टिल्टिंग ट्रेन मिल जाएगी। इस तरह के टेक्नोलाजी का उपयोग करके 100 वंदे भारत ट्रेन का निर्माण किया जा रहा है। ये सभी ट्रेन घुमावदार रास्ते पर बाइक की ही तरह तेज गति से मुड़ने में सक्षम होगी। एक अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि साल 2025 तक 400 वंदे भारत ट्रेन को बनाया जाएगा, जिसमें से 100 में इस तकनीक का प्रयोग किया जाएगा।
आधिकारी ने कहा इसके लिए हम एक टेक्नोलाजी पार्टनर के साथ साझेदारी करेंगे। दो से तीन वर्ष में हमारे पास इस तकनीक के प्रयोग वाली 100 वंदे भारत ट्रेन होगी। ऐसी ट्रेन घुमावदार रास्ते पर तेज गति के साथ मुड़ सकेंगी। उन्होंने कहा कि अभी तक ट्रेन जब घुमाव पर मुड़ती है तो यात्रियों को सहारा लेना होता है, लेकिन इस तकनीक के प्रयोग से यात्रियों को पहले की तुलना में आराम मिलेगा।
कई बार जब ट्रेन गति से एक मोड़ पर चक्कर लगाती है, तो अंदर की वस्तुएं और यात्री केन्द्रापसारक बल का अनुभव करते हैं, जो उन्हें बाहर की ओर धकेलता है। इसके प्रभाव की वजह से चीजें अंदर खिसक सकता है। इसके साथ ही लोगों को घुटन महसूस हो सकती है। खड़े यात्रियों को भी संतुलन खो देते है। लेकिन इन ट्रेनों को कर्व के अंदर की ओर कैरिज को झुकाकर प्रभाव के अनुकुल काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस प्रकार G-Force मदद मिल जाएगी।
दुनिया के 11 देशों में टिल्टिंग ट्रेनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन देशों में इटली, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, फिनलैंड, रूस, चेक गणराज्य, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, चीन, जर्मनी और रोमानिया शामिल है।