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स्मार्टफोन में Aadhaar ऐप प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं, सरकार ने वापस लिया प्रस्ताव

Pre Installation of Aadhaar: सरकार ने स्मार्टफोन में आधार ऐप प्री-इंस्टॉल करने का प्रस्ताव वापस ले लिया है। इस फैसले से मोबाइल कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।

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भारत

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Devika Chatraj

Apr 18, 2026

Aadhaar ऐप प्री-इंस्टॉल (File Photo)

Aadhaar Pre Installation: भारत सरकार ने स्मार्टफोन यूजर्स और कंपनियों से जुड़े एक बड़े प्रस्ताव को वापस लेने का फैसला किया है। इस प्रस्ताव के तहत मोबाइल फोन में आधार ऐप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य करने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इस फैसले के बाद स्मार्टफोन कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।

क्या था आधार ऐप प्री-इंस्टॉल प्रस्ताव?

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने प्रस्ताव दिया था कि नए स्मार्टफोन्स में आधार ऐप पहले से इंस्टॉल होना चाहिए। इस पर जनवरी में IT मंत्रालय ने कई बड़ी टेक कंपनियों जैसे Apple, Google और अन्य मोबाइल निर्माताओं के साथ चर्चा भी शुरू की थी।

सबसे जरूरी दस्तावेजों में से एक आधार

आधार भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली है, जिसमें 12 अंकों का यूनिक नंबर होता है और यह नागरिक के फिंगरप्रिंट व आइरिस डेटा से जुड़ा होता है। देश के लगभग 1.34 अरब लोगों के पास आधार है और इसका उपयोग बैंकिंग, सरकारी सेवाओं और एयरपोर्ट पर पहचान सत्यापन जैसे कई कार्यों में किया जाता है।

सरकार ने क्यों वापस लिया प्रस्ताव?

UIDAI ने मीडिया को दिए एक बयान में बताया कि IT मंत्रालय ने इस प्रस्ताव की समीक्षा के बाद इसे आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। मंत्रालय ने साफ कहा कि वह स्मार्टफोन में किसी भी सरकारी ऐप को अनिवार्य रूप से प्री-इंस्टॉल करने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, सरकार ने इस निर्णय के पीछे कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है।

स्मार्टफोन कंपनियों का विरोध

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple और Samsung जैसी बड़ी कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया था। कंपनियों ने मुख्य रूप से तीन बड़ी चिंताएं सामने रखीं जिनमें डिवाइस सिक्योरिटी और प्राइवेसी जोखिम, सॉफ्टवेयर कम्पैटिबिलिटी की समस्याएं, मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट में बढ़ोतरी शामिल है, क्योंकि अलग-अलग बाजारों के लिए अलग सिस्टम बनाना पड़ता। इन कंपनियों का कहना था कि किसी ऐप को जबरन प्री-इंस्टॉल करना तकनीकी और व्यावसायिक दोनों स्तरों पर चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

पिछले प्रयास हुए फेल

UIDAI ने पिछले दो सालों में करीब छह बार ऐसे प्रस्ताव आगे बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन हर बार स्मार्टफोन इंडस्ट्री से विरोध के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी। यह भी सामने आया है कि भारत में इससे पहले भी सरकारी ऐप्स को प्री-इंस्टॉल करने के प्रयास किए गए थे, जिन्हें बाद में वापस लेना पड़ा था।

स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी में भारत

विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला भारत के डिजिटल अभियान और ग्लोबल टेक कंपनियों को आकर्षित करने की रणनीति के बीच संतुलन को दिखाता है। भारत इस समय खुद को एक ग्लोबल स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, और ऐसे नियम विदेशी कंपनियों के निवेश निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं।