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कंगारू देश में तिरंगे की धमक: अंग्रेजों को पछाड़ भारतीय बने ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय

Australia Indian Immigrants: ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के निवासियों की संख्या 9,71,020 तक पहुंच गई है, जो कुल आबादी का 5.2 प्रतिशत है। इसके मुकाबले इंग्लैंड में जन्मे प्रवासियों की संख्या 9,70,950 रह गई है।

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भारत

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Saurabh Mall

May 08, 2026

Australia Indian Immigrants

ऑस्ट्रेलिया में पहली बार भारतीय मूल के लोग ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े प्रवासी समुदाय बन गए हैं। (AI जनरेटेड इमेज)

Indians Become Biggest Migrant Group Australia: ऑस्ट्रेलिया में पहली बार भारतीय मूल के लोग ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े प्रवासी समुदाय बन गए हैं। दशकों तक इस स्थान पर काबिज रहने वाले अंग्रेजों (ब्रिटिश मूल के लोगों) को भारतीयों ने पीछे छोड़ दिया है। 30 जून 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के निवासियों की संख्या 9,71,020 तक पहुंच गई है, जो कुल आबादी का 5.2 प्रतिशत है। इसके मुकाबले इंग्लैंड में जन्मे प्रवासियों की संख्या 9,70,950 रह गई है।

यह बदलाव इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि यह पहला मौका है जब किसी गैर-ब्रिटिश मूल के समूह ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां 2015 से 2025 के बीच ऑस्ट्रेलिया में भारतीय आबादी में 5.22 लाख की भारी वृद्धि हुई, वहीं यूरोपीय मूल के प्रवासियों, विशेषकर इटली, ग्रीस और जर्मनी से आने वाले लोगों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।

भारतीयों के लिए आसान नहीं है आगे राह

भारतीयों की इस बढ़ती संख्या ने जहां आर्थिक समृद्धि में योगदान दिया है, वहीं ऑस्ट्रेलिया की आंतरिक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया आवास संकट और जनसंख्या वृद्धि के दबाव से जूझ रहा है। इसके कारण अप्रवासन एक ज्वलंत राजनीतिक मुद्दा बन गया है। 'वन नेशन' जैसी पार्टियां इस जनसांख्यिकी बदलाव के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी हैं। 'मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया' जैसे प्रदर्शनों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय समुदाय के लिए वहां पूरी तरह सामाजिक स्वीकृति पाना अभी भी एक चुनौती है। आर्थिक सफलता के बावजूद सांस्कृतिक अलगाव बढ़ रहा है। 'एंटी इमिग्रेंट' भावनाओं ने चुनौतियां खड़ी की हैं। भारतीयों को अब 'आउटसाइडर' के रूप में पेश किया जा रहा है। वीजा और आवास संकट प्रवासियों के लिए बड़ी बाधा है।

अब विदेशी मूल के 32 प्रतिशत लोग

ऑस्ट्रेलिया की 32 प्रतिशत आबादी अब विदेशी मूल की है। भारत इस सूची में शीर्ष पर है। चीन 7.32 लाख के साथ तीसरे स्थान पर है। 2005 से प्रवासी आबादी 3 प्रतिशत सालाना बढ़ी है। जबकि स्थानीय आबादी 1 प्रतिशत की दर से बढ़ी है।

यूरोपीय समुदायों का ढलान

इटली पहली बार शीर्ष 10 देशों से बाहर हुआ है। इंग्लैंड की प्रवासी आबादी में 36 हजार की कमी आई। ग्रीस और जर्मनी के प्रवासियों में भी गिरावट है। इन समुदायों की औसत आयु अब 60 के पार है।

भारतीय और चीनी शीर्ष प्रवासियों में शामिल

जन्म स्थान प्रवासियों की संख्या (2025), कुल आबादी में हिस्सा (%), 2015-2025 के बीच वृद्धि/कमी

भारत 9,71,020 5.2% 5,22,000
इंग्लैंड 9,70,950 5.2%, -36,000 (कमी)
चीन 7,32,000 3.9% 2,23,000 (वृद्धि)

वीजा धारकों के लिए बढ़ेंगी चुनौतियां

भारतीयों को अक्सर वहां एक 'मॉडल माइनॉरिटी' के रूप में देखा जाता है, लेकिन दूसरी ओर उन्हें 'सरप्लस एक्टर्स' भी कहा जा रहा है जो इमिग्रेशन सिस्टम का लाभ उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय प्रवासियों का अनुभव उनकी वीजा स्थिति, वर्ग और पीढ़ी के आधार पर अलग-अलग है। अस्थायी वीजा धारकों के लिए जहां जीवन-यापन का संघर्ष बड़ा है, वहीं स्थायी निवासियों की स्थिति कहीं बेहतर है। भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों की प्रगाढ़ता के लिए इस विशाल प्रवासी समुदाय के सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभवों को समझना अब अनिवार्य हो गया है।